शहर की पुरानी बस्ती में शुमार सदियापुर की सड़क, गली, नाली ही बदहाल नहीं है, यहां यमुना किनारे स्थित ककरहा घाट भी गंदगी से पटा पड़ा है। घाट पर चौतरफा गंदगी और दुर्गंध के बीच लोग शवों को लेकर अंतिम संस्कार के लिए भी आते हैं। यहां दो बड़े नालों से सीधे यमुना में बस्ती का मलयुक्त पानी गिर रहा है। घाट से बमुश्किल पांच सौ मीटर की दूरी पर यमुना में इंटेकवेल लगा है, जिसके जरिए नदी का पानी खुसरोबाग स्थित पंपिंग स्टेशन में पहुंचाया जाता है। वहां से इस पानी को फिल्टर कर पुराने शहर के बड़े हिस्से में आपूर्ति होती है। घाट का यह तब है जब नगर निगम को नमामि गंगे योजना में घाटों की सफाई की भी जिम्मेदारी दी गई है लेकिन नगर आयुक्त शेष मणि पांडेय के पास शायद इन कामों को कराने का समय नहीं है।
सोमवार को परेड मैदान में हुई रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाहाबाद को निषादराज की धरती कह कर संबोधित किया था। सदियापुर में बड़ी संख्या में निषाद समुदाय के लोग रहते हैं और नगर निगम की अनदेखी के कारण घनी आबादी वाला यह मोहल्ला पूरी तरह बदहाल है। इमली ढाल से सदियापुर गली सीधे यमुना किनारे ककरहा घाट पर निकलती है। इस घाट पर शवों का अंतिम संस्कार भी होती है। घाट के दाहिनी तरफ कच्चा नाला है जबकि बाई ओर पक्का नाला बना है। इमली ढाल से होकर करीब एक किलोमीटर अंदर तक गली में सीवर लाइन बिछ गई लेकिन उसे चालू नहीं किया गया है। इसकी वजह से घरों से निकलने वाला मलयुक्त पानी नालियों से होकर दोनों नाले के जरिए यमुना में गिर रहा है।
नगर निगम कभी गंगा-यमुना के किनारे सफाई कराता भी है तो उसे सिर्फसंगम क्षेत्र ही नजर आता है। ककरहा घाट पर निगम ने कभी सफाई नहीं कराई। स्थानीय निवासी सुमित श्रीवास्तव, गुड्डू पंडा आदि का कहना है कि भीषण गंदगी और बदहाल ककरहा घाट को सुधारने के लिए निगम ने कोई कदम नहीं उठाया। निगम से कई बार सफाई के लिए मांग भी की गई लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।