इलाहाबाद (ब्यूरो)। राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय में यूजीसी के सहयोग से ‘समसामयिक परिवेश में कबीर के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर दो दिनी गोष्ठी शनिवार को शुरू हुई। मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने कहा कि कबीर के लेखन में स्वतंत्रता थी।
समानता, स्वतंत्रता, सद्भाव और प्रेम ही इंसानियत के मूलमंत्र हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर गोपेश्वर सिंह ने कहा कि कबीर और तुलसी दोनों ही पर पीड़ा एवं सहानुभूति को मान्यता देते हैं। प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने कहा कि कबीर ने अपने समय के विद्वानों की चिंता न करके उनके विरोध में लिखने का साहस किया और वर्तमान में इसकी आवश्यकता है। कबीर के बारे में अब भी बहुत खोजा जाना बाकी है।
अध्यक्षता डॉ.शशि टंडन ने की। प्राचार्य डॉ.प्रमिला टंडन ने गोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकश डाला। संचालन संयोजक सचिव डॉ.नीलिमा सिंह ने किया। विभिन्न तकनीकी सत्रों को प्रोफेसर राम किशोर शर्मा, प्रोफेसर प्रेम शंकर तिवारी, डॉ.लालसा यादव आदि ने संबोधित किया। 400 प्रपत्र भी प्रस्तुत किए गए।