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Prayagraj News: पगडंडियों से ट्रैक तक का सफर...जमीं से जीता आसमान

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चार सालों से पगडंडियों पर दौड़ लगाई, गांव के बगीचों, खेत-खलिहानों में दिन-दोपहर पसीना बहाया। पहली बार इंदिरा मैराथन में दौड़े तो कई अनुभवी धावक बहरिया के लाल को छू तक न सके। रोहित के संघर्ष ने उन्हें मैराथन में तीसरा स्थान दिलाया। उन्होंने जमीं से आसमान जीत लिया।
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बहरिया के धमौर निवासी रोहित सरोज ने बताया कि बचपन से ही उन्हें दौड़ने का शौक था। पिछले चार साल से वह दिन-दोपहर पसीना बहाकर इंदिरा मैराथन की तैयारी कर रहे थे। मैदान न होने पर पगडंडियों और बगीचों में दौड़ लगाते थे। घर से सात किमी दूर केवीएम स्कूल के विद्यालय के मैदान पर खेल शिक्षकों के मार्गदर्शन में मेहनत की। उसी का नतीजा रहा कि वह मैराथन जीतने में सफल रहे।
रोहित ने बताया कि उन्होंने कभी भी सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ नहीं लगाई। पगडड़ियां, खेत और पक्की सड़कें ही उनका मैदान थीं। रोहित के प्रशिक्षक खेल शिक्षक अली अहमद खान रहे। उन्होंने दौड़ की बारीकियां बताईं। साथ ही मैराथन में स्टेमिना बनाए रखने की तकनीक बताई। रोहित ने कहा कि वह अगली बार इंदिरा मैराथन के विजेता होंगे। इसके लिए जी जान लगा देंगे।
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रोहित के पिता संतलाल किसान हैं। माता शांति देवी गृहिणी हैं। संतलाल के दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा कमलेश यूपी पीएसी में है। छोटे बेटे की सफलता पर परिजन खुश हैं। विजेता रोहित के गांव में पहुंचने पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। खिलाड़ी के साथ सेल्फी लेने वालों की होड़ लगी रही।
सोशल मीडिया पर बहरिया के लाल को लोग बधाई देते रहे। ब्लॉक प्रमुख बहरिया शशांक मिश्रा ने कहा कि रोहित सरोज ने इंदिरा मैराथन में तीसरा स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस दौरान ग्राम प्रधान मानसिंह यादव, फूल सिंह चौहान व कोटेदार दिनेश कुमार यादव, गुफरान मलिक, राम शंकर मिश्रा, रंजीत यादव ने रोहित की सफलता पर खुशी जाहिर की है।
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