वेबसाइट पर मिले आंकड़ों के अनुसार आईबीपीएस ने बैंकों के लिए 2015-16 में 37000 पद घोषित किए गए थे, जिसके लिए एक करोड़ 27 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए। इसी तरह 2019-20 में बैंकों में 16 हजार 400 पदों के लिए एक करोड़ 45 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। वर्तमान सत्र 2020-21 के लिए संभावित 18000 पद घोषित किए गए हैं और इसके लिए भी अभ्यर्थियों का आंकड़ा डेढ़ करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। बता दें कि यह आंकड़े आईबीपीएस की ओर से केंद्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों में नियुक्तियों के हैं, जबकि एसबीआई अपने यहां नियुक्ति के लिए खुद परीक्षाओं का आयोजन कराता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बैंकों में भर्ती के अवसर और कम होंगे। इसके पीछे की मुख्य वजह बैंकों का विलय और ग्राहक सेवा केंद्रों की संख्या के साथ उनके अधिकार बढ़ाए जाने की प्रक्रिया है। एसबीआई समेत ज्यादातर बैंकों की ओर से सेवा केंद्र खोले जाने के साथ करेस्पांडेंट रखे जाने शुरू हो गए हैं। यह करेस्पांडेंट कमीशन पर बैंक की सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
खास बात यह कि ग्राहक सेवा केंद्रों पर पहले एक ही कंप्यूटर रखने की छूट थी, लेकिन एसबीआई ने अब छह कंप्यूटर रखने की छूट दे दी है। इसके अलावा अब बैंकिंग लेनदेन के अलावा लोन, पासबुक में इंट्री समेत ज्यादातर सेवाएं भी इन केंद्रों से संचालित होंगी। यानी, ग्राहक सेवा केंद्र बैंक की तरह ही काम करेंगे। ऐसे में बैंक की शाखाओं पर भार कम होने की बात कही जा रही है।