प्रयागराज जिला अदालत में जवाहर पंडित हत्याकांड में फैसला आने के बाद अपने आवास पर जवाहर यादव की पत
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जवाहर हत्याकांड: भाड़े के शूटरों द्वारा घटना को अंजाम देने की थ्योरी आगे बढ़ाई थी बचाव पक्ष ने
प्रयागराज। पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित हत्याकांड में बचाव पक्ष ने घटना के तार बनारस में हुए शराब व्यवसायी जवाहर जायसवाल पर जानलेवा हमले से जोड़ने की भी कोशिश की थी। जवाहर जायसवाल पर इस घटना के कुछ दिन पूर्व ही हमला हुआ था जिसमें एके-47 राइफल का प्रयोग किया गया था। बचाव पक्ष की दलील थी कि जवाहर जायसवाल के पक्ष में जवाहर यादव ने विरोधी पक्ष को धमकी दी थी। जोकि उसकी हत्या की वजह बनी।
सीबीसीआईडी की विवेचना में एक गवाह के बयान में आए इस तथ्य को बचाव पक्ष ने आधार बनाया था। चूंकि दोनों घटनाओं में एक ही प्रकार के हथियार का इस्तेमाल हुआ था इसलिए बचाव पक्ष इस दिशा में बढ़ा कि दोनों घटनाओं को अंजाम देने वाले लोग एक ही हो सकते हैं। बकौल विजमा के वकील लल्लन यादव इस थ्योरी को उनकी ओर से विरोध किया गया क्योंकि एके-47 कोई लाइसेंसी हथियार नहीं है और इसके दूसरों के पास भी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
हत्याकांड में अदालत ने चारों आरोपियों कपिलमुनि, उदयभान, सूरजभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को दोषी करार दे चुकी है। उनकी सजा के बिंदु चार नवंबर को सुनवाई के बाद सजा का ऐलान किया जाएगा।
जवाहर पंडित को लगी थी 17 गोलियां
13 अगस्त 1996 को हुए हमले में जवाहर यादव उर्फ पंडित के शरीर पर गोलियों के 17 घाव पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि ताबड़तोड़ फायरिंग में की गई फायरिंग में जवाहर को करीब 17 गोलियां लगी थी जिसमें से कई एके-47 से चलाई गई थी। इसके अलावा अन्य असलहों से चली गोलियां भी लगी थी। पुलिस द्वारा तैयार पंचनामा रिपोर्ट में जवाहर के शरीर पर 15 चोटों का जिक्र किया गया है। यह चोटें सिर से लेकर पैर के पंज तक थी। इनमें गोली के छर्रों के निशान भी मौजूद थे।