आजकल तारामंडल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। यहां आने वालों को सिर्फ तारों की कहानियां सुनाई देती हैं, दिखाई कुछ नहीं देता। कारण यह है कि यहां लगे 35 प्रोजेक्टर में से आधे अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इनसे तस्वीरें साफ नहीं दिखतीं। 40 मिनट तक अंधेरे चेंबर से जब लोग बाहर निकलते हैं तो खुद को ठगा पाते हैं। लोग यहां के कर्मचारियों से सवाल भी करते हैं, लेकिन वह मजबूरी गिना देते हैं।
तारामंडल प्रशासन का दावा है कि इसे नया स्वरूप देने के लिए नौ करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव भेजा है। इससे 35 प्रोजेक्टर और उन्हें कंट्रोल करने वाली मशीन बदली जाएगी। पर्दों को भी बदला जाएगा। यह काम महाकुंभ से पहले पूरा कर लेने की तैयारी है।
नाराजगी जताते हैं दर्शक
तारामंडल में दिखाए जा रहे शो में कुछ दिखता ही नहीं है। ग्रहों-उपग्रहों की चमक बेहद घट गई है। टिकट के नाम पर 70 रुपये बेवजह ही खर्च हो गए। - शिवानी पांडे, मम्फोर्डगंज
अंदर कुछ ठीक से दिखा ही नहीं। मिनट बर्बाद हो गए। दर्शकों को पहले से कुछ बताते भी नहीं हैं। जब प्रोजेक्टर खराब हैं तो इसे चला ही क्यों रहे हैं। - राबिया खातून, तेलियगंज
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अत्याधुनिक प्रोजेक्टर लगाकर तारामंडल को नया स्वरूप देने के लिए शासन को नौ करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। धन मिलते ही जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। महाकुंभ से पहले दिसंबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा। - डॉ. वाई रवि किरन, निदेशक, जवाहर प्लेनेटेरियम