इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने राजस्व मुकदमे की पत्रावलियां गायब होने पर हैरानी जताई है। जौनपुर के डीएम से पूछा है कि आखिर मुकदमे की पत्रावलियां न्यायालय से गायब क्यों हैं?
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने मंगलेश व चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। डीएम से पांच मार्च तक गायब इनकी जानकारी अदालत में पेश करने के लिए कहा है। मामला जौनपुर के सदर तहसील का है। याची चकबंदी अधिकारी की अदालत ने 1986 में विपक्षियों के पक्ष में एकपक्षीय आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ याचियों ने पुनर्स्थापना अर्जी दाखिल की।
इस पर एकपक्षीय आदेश स्थगित हो गया। कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का आदेश पारित किया। लेकिन, न्यायालय से अभिलेख गायब हो गए। इसका फायदा उठा कर विपक्षियों ने राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवा लिया। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि विपक्षियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से मुकदमे की पत्रावलियां गायब करा राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवा दिया है। इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बरकरार है। पत्रावलियां गायब होने के कारण मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा।कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया और डीएम से पांच मार्च तक गायब पत्रावलियों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। पूछा है कि आखिर न्यायालय से पत्रावलियां गायब क्यों हैं।