सरकारी अस्पतालों में खुले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों में मरीजों को कई दवाएं न मिलने से परेशानी हो रही है। मरीजों का दावा है कि अस्पतालों में मात्र 20 फीसदी दवाएं ही उपलब्धता रहती है। लगभग 70 फीसदी सर्जिकल आइटम भी नहीं मिलते हैं। ऐसे में मरीजों को मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं और सर्जिकल आइटम खरीदने पड़ते हैं।
तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली), मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) व जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) के जन औषधि केंद्रों पर 250 से 300 तरह की ही दवाएं मिल रही हैं, जबकि 500 से अधिक तरह की दवाएं उपलब्ध कराने का बोर्ड लगा है। इन केंद्रों पर त्वचा रोग, न्यूरोलॉजी, ईएनटी रोग, आयरन सिरप, कफ सिरप, एंटीबायोटिक समेत कई दवाएं लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं।
इसके अलावा गरम पट्टी, एक्सएल और डबल एक्सएल की नैपकीन समेत कई सर्जिकल आइटम नहीं है। जबकि भारत सरकार के अधीन स्वायत्त संस्था फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराती है। वहीं, जन औषधि केंद्रों के फार्मासिस्ट का कहना है कि हर बार ऑर्डर लगाया जाता है, लेकिन दवाएं नहीं मिलती हैं। इसके अलावा पीएमबीआई के अधिकारी दवा उपलब्ध न होने का कारण भी नहीं बताते हैं।
जो दवा वेंडर की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है, वही केंद्रों पर रहती है। मरीजों की मांग के आधार पर लगभग सभी दवाएं ऑर्डर की जाती हैं।
- डॉ. राजेश सिंह, नोडल, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना, प्रयागराज।