आईटीआई के विद्यार्थी सामाजिक सरोकार से जुड़ेंगे। उन्हें पुराने कपड़ों से थैले बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए स्मार्ट सिटी और आईटीआई नैनी के बीच समझौता हो चुका है। यह योजना सफल हुई तो प्लास्टिक के थैलों पर कुछ हद तक रोक लग सकेगी।
नगर निगम और स्मार्ट सिटी की ओर से घरों से पुराने कपड़े, जूते, खिलौने आदि लेने की योजना शुरू की गई है। इसके तहत स्मार्ट सिटी की ओर से शहर में 25 स्थानों पर नेकी की दीवार बनाने का निर्णय लिया गया है, जहां लोग पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे। दो जगहों पर नेकी की दीवार बन भी गई है और शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक हैं। शहरवासियों ने नेकी की दीवार में बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े जमा किए हैं।
स्मार्ट सिटी की ओर से इन कपड़ों के थैले बनाने एवं शहरवासियों में वितरित करने की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में आईटीआई नैनी से समझौता हुआ है। सिलाई की विधा में प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थी प्रयोग की कक्षाओं के अंतर्गत इन कपड़ों से थैले तैयार करेंगे। फिलहाल, इसके लिए उन्हें या संस्थान को कुछ नहीं मिलेगा।
स्मार्ट सिटी के मिशन मैनेजर संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि नेकी की दीवार में आए पुराने कपड़ों से थैले तैयार कराके लोगों को वितरित किए जाएंगे। यह काम संस्थाओं की मदद से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में यदि थैलों की कुछ कीमत मिलने लगी तो संस्थान को भी भुगतान किया जाएगा।