उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) पहली बार पीसीएस और एसीएफ/आरएफओ की परीक्षा एक साथ आयोजित कराने जा रहा है। इस बार पीसीएस में लोअर सबऑर्डिनेट के भी कई पद शामिल कर लिए गए हैं। ऐसे में पहले से तय था कि इस बार आवेदनों की संख्या में भारी इजाफा होगा, इसके बावजूद आयोग ने परीक्षा के लिए अधूरी तैयारी की। ‘अमर उजाला’ के दस जुलाई के अंक में ही खबर प्रकाशित की गई थी कि आयोग को परीक्षा की तैयारी के लिए कम समय मिलेगा और अभ्यर्थियों की संख्या काफी बढ़ सकती है। ऐसे में आयोग के लिए परीक्षा समय से करा पाना किसी चुनौती से कम नहीं।
पहली बार पीसीएस और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ) की प्रारंभिक परीक्षा एक साथ कराई जा रही है। इसके अलावा पीसीएस में लोअर सबऑर्डिनेट के भी कई पद शामिल किए गए हैं। कुल 917 पदों के लिए परीक्षा होनी हैं, जिनमें पीसीएस के 831 पद शामिल हैं। आयोग ने पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा की तिथि 19 अगस्त निर्धारित की थी जबकि आवेदन छह जुलाई से छह अगस्त तक मांगे गए। आवेदकों की संख्या के आधार पर ही परीक्षा केंद्रों का निर्धारण होता है और पेपर छपवाए जाते हैं।
इसके अलावा अन्य तैयारियां भी अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर की जाती हैं। आयोग के पास इन सभी कार्यों को पूरा करने के लिए सात अगस्त से 18 अगस्त (12 दिन) तक का समय था। महज 12 दिनों में प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाना आयोग के लिए बड़ी चुनौती थी, इसके बावजूद प्रारंभिक परीक्षा की तिथि 19 अगस्त निर्धारित की गई। साफ है कि आयोग ने जल्दबाजी में परीक्षा तिथि तो घोषित कर दी लेकिन तैयारी अधूरी थी। नतीजा कि आयोग को परीक्षा टालनी पड़ी।