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UP : फर्जी दस्तावेज पर शिक्षक की नियुक्ति रद्द करना सही, हाईकोर्ट ने कहा ऐसे शिक्षक सहानुभूति के हकदार नहीं

Sat, 13 Jan 2024 04:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची को 2005 में प्राथमिक विद्यालय हरनाही चकरवा बहोरदास, जिला देवरिया में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में 2008 में हेडमास्टर के रूप में प्रमोशन मिला। 2015 में शिकायत के आधार पर जांच के दौरान याची की नियुक्ति जाली शैक्षिक दस्तावेजों पर होना पाया गया।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाइकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्ति को रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा है और इसके खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याची जैसा व्यक्ति, जिसने जाली शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक के रूप में नियुक्ति हासिल की है, किसी भी सहानुभूति का हकदार नहीं हो सकता है। यह आदेश जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने देवरिया के शिव कुमार मिश्र की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

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याची को 2005 में प्राथमिक विद्यालय हरनाही चकरवा बहोरदास, जिला देवरिया में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में 2008 में हेडमास्टर के रूप में प्रमोशन मिला। 2015 में शिकायत के आधार पर जांच के दौरान याची की नियुक्ति जाली शैक्षिक दस्तावेजों पर होना पाया गया।

याची के वकील ने तर्क दिया कि 2022 में याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। आरोप पत्र उन्हें दिया गया और जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए, उसे उपलब्ध नहीं कराया गया। याची की नियुक्ति रद्द करने का आदेश उसे जांच रिपोर्ट की प्रति दिए बिना पारित किया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

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कोर्ट ने कहा उपरोक्त परिस्थितियों में न्यायालय को इस बात पर विचार करना होगा कि क्या जांच रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध न कराने से याची पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि उनके खिलाफ जाली दस्तावेज बनाने के आरोप साबित हो चुके हैं।

अदालत ने पाया कि याची अध्यापक ने जांच अधिकारी और अनुशासनात्मक प्राधिकारी के निष्कर्षों का खंडन करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया कि उसने जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त नहीं की। न्यायालय ने माना कि याची जांच रिपोर्ट न देने के कारण हुए किसी भी पूर्वाग्रह को प्रदर्शित करने में विफल रहा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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