कोर्ट ने कहा उपरोक्त परिस्थितियों में न्यायालय को इस बात पर विचार करना होगा कि क्या जांच रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध न कराने से याची पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि उनके खिलाफ जाली दस्तावेज बनाने के आरोप साबित हो चुके हैं।
अदालत ने पाया कि याची अध्यापक ने जांच अधिकारी और अनुशासनात्मक प्राधिकारी के निष्कर्षों का खंडन करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया कि उसने जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त नहीं की। न्यायालय ने माना कि याची जांच रिपोर्ट न देने के कारण हुए किसी भी पूर्वाग्रह को प्रदर्शित करने में विफल रहा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।