बरेली। मीरगंज क्षेत्र में कैंसर से हो रही मौतों का मुद्दा विधानसभा में गूंजा तो सरकार ने आर्सेनिक रिमूवल प्लांट लगवा दिए। चंद माह बाद ही ये प्लांट ठप हुए तो संबंधित विभाग व प्रशासन ने इनकी कोई सुध नहीं ली। जबकि कैंसर लोगों की जान लेते रहा।
किसी का कमाऊ बेटा चला गया तो किसी की मांग उजड़ गई। कई परिवार तबाह हो गए। इसके बावजूद जिम्मेदार बेपरवाह बने रहे। लगातार हो रही मौतों के बाद भी उनकी संवेदना नहीं जागी। बहरोली की ग्राम प्रधान चंद्रवती ने बताया कि उनके गांव में बीते चार-पांच साल में कैंसर से 28 लोगों की मौत हो चुकी है। प्लांट लगने के बाद भी लोगों को फायदा नहीं मिल पा रहा। गांव की आबादी साढ़े हजार है। शुद्ध पानी के लिए कोई सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है।
गांव में लगे तीनों प्लांट बंद हैं। लोग परेशान हो रहे हैं। प्लांट ठप होने के बाद सक्षम लोगों ने अपने खर्चे पर शुद्ध पेयजल का इंतजाम कर लिया। आर्थिक तौर पर कमजोर लोग परेशान हुए तो जल निगम ने पेयजल आपूर्ति शुरू कराई, लेकिन वह भी आए दिन ठप रहती है। अभी 15 दिनों से आपूर्ति ठप है। हुरहुरी की प्रधान सुधा शाक्य ने बताया कि उनके गांव में पांच साल में कैंसर 24 जिंदगियां निगल चुका है। स्वच्छ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
जो आर्सेनिक रिमूवल प्लांट लगाया गया था, वह चार महीने में ही खराब हो गया था। ग्रामीणों के मुताबिक जहां-जहां प्लांट लगे वहां कैंसर और दूसरी बीमारियों के पीछे पेयजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक होना भी एक कारण है। अमर उजाला ब्यूरो