आदि शंकराचार्य (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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आदि शंकराचार्य सनातन धर्म के सूर्य थे। उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा के लिए अद्भुत कार्य किया। उन्होंने जिस तरह चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर सनातन संस्कृति का ध्वज फहराया, उससे समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। यह बातें सोमवार को शंकराचार्य जयंती पर युवा चेतना की ओर से आयोजित बेविनार में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कही।
स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि संतों को भारतीय राजनीति व्यवस्था को अनुशासित करने के लिए आगे आना चाहिए। बतौर मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति केजे ठाकर ने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य का पूरा जीवन संघर्षमय रहा। उन्होंने भारत को व्यवस्थित करने का बहुत प्रयास किया। महज 32 वर्ष की आयु में चारों ओर उन्होंने सनातन धर्म के ध्वज को लहराया। युवा वर्ग को आदिगुरु के धर्म की स्थापना और उल्लेखनीय कार्यों के बारे में जानना चाहिए।
न्यायमूर्ति ठाकर ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सबको श्रम करना होगा। वेबिनार की अध्यक्षता कर रहे युवा चेतना के संयोजक रोहित कुमार सिंह ने आदिगुरु की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की। साथ ही कहा कि केरल स्थित उनके जन्मस्थान को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बतौर मुख्य वक्ता नेहु सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एसके श्रीवास्तव ने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य के दिखाए रास्ते पर चलकर ही सत्य की प्राप्ति हो सकती है। इस दौरान कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्विद्यालय रामटेक के कुलपति डॉ श्रीनिवास वार्षाखेड़ी, उद्यमी मनोज गोयल ने विचार व्यक्त किए।
कांचीपुरम मंदिर में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अभिषेक प्रयागराज। दारागंज स्थित कांचीपुरम मंदिर में आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सविधि पूजन किया गया। आदि शंकराचार्य की मूर्ति के अभिषेक के बाद आरती उतारी गई। इस दौरान शंकराचार्य के संदेशों को आत्मसात करने पर बल दिया गया। इस मौके पर अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चंद्रनाथ चकहा मधु, कांचीपुरम मंदिर के व्यवस्थापक रमणी शास्त्री, श्रवण कुमार शर्मा, माधवानंद शर्मा, उदय चंद्र मिश्र, अमितराज वैद्य, राहुल तिवारी, अविरल मिश्रा, विपिन, अखिलेश, सचिन मिश्रा, चंदन तिवारी समेत तमाम लोग उपस्थित थे।