मामला कानपुर नगर से जुड़ा है। पक्षकार गीता देवी याचियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करा चुकी थी लेकिन उसमें एससीएसटी एक्ट नहीं लगाया गया था। उसने एससीएसटी में पहले भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रयास किया था लेकिन वह सफल नहीं हुई थी। उसने 156(3) के तहत परिवाद दर्ज कराया। विशेष न्यायाधीश ने 19 नवंबर 2022 को सभी याचियों के खिलाफ समन जारी कर दिया।
याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट के सामने प्रश्न था कि क्या कोर्ट सीआरपीसी की धारा 482 के अंतर्गत एससीएसटी अधिनियम में जारी समन पर सुनवाई कर उसे रद्द कर सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एससीएसटी एक्ट में जारी समन आदेश पर सुनवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कानपुर नगर विशेष सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित समन आदेश को रद्द कर दिया।