इलाहाबाद। पीसीएस बनने के लिए विषय तथा आसपास की घटनाओं पर पारखी नजर के साथ बतख और हंस में अंतर की जानकारी भी होनी चाहिए। पीसीएस-2014 का साक्षात्कार बुधवार को शुरू हुआ। इसमें एक अभ्यर्थी से बतख और हंस में अंतर पूछा गया। एक अभ्यर्थी से पांच परमहंस तथा पांच पुराने संतों के नाम पूछे गए।
साक्षात्कार सुबह 10 बजे शुरू हुआ। सात अगस्त तक चलने वाले साक्षात्कार में 579 पदों के लिए 1870 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इस बार व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिला। पहले एक चरण का साक्षात्कार खत्म होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को अध्यक्ष संबोधित करते थे। इस बार भी इस तरह की पहल की गई लेेकिन इस समय पीसीएस-2015 की मुख्य परीक्षा चल रही है। इंटरव्यू देने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा भी दे रहे हैं। ऐसे में उन्होंने साक्षात्कार के बाद तत्काल वापसी का अनुरोध किया।
इसलिए जिनका साक्षात्कार हो जाता, उन्हें जाने दिया जाता। साक्षात्कार देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों का कहना था कि नूडल्स और मैगी ने उन्हें यहां भी परेशान किया। सदस्यों ने इस पर कई सवाल पूछे। दर्शनशास्त्र विषय से मुख्य परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों से बुद्धि और विवेक में अंतर, मुक्ति क्या है, जैसे प्रश्न पूछे गए तो इतिहास के एक अभ्यर्थी से अशोक के पतन का कारण पूछा गया। एक अभ्यर्थी से यह भी पूछा गया कि ऐसे इतिहासकार के बारे में बताएं, जिसने अकबर के बारे में कुछ न लिखा हो। एक अभ्यर्थी से पूछा गया कि यदि मौका मिले तो अपने घर के किसी फंक्शन में किन पांच महिला खिलाड़ियों को आमंत्रित करेंगे। अभ्यर्थियों से योग, व्यापम घोटाला, नीति आयोग, महिला सशक्तिकरण, कनहर परियोजना, शिक्षा का अधिकार, सुशासन, अटल पेंशन योजना, नेहरू रिपोर्ट, अफगानिस्तान संकट आदि समसामयिक मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए।