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Magh Mela : संत सम्मेलन में गंगा निर्मलीकरण का उठा मुद्दा, जनसंख्या नियंत्रण, गोवंश की रक्षा पर भी चर्चा

Sun, 29 Jan 2023 09:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

माघ मेला के सेक्टर पांच स्थित आचार्यबाड़ा रामानुजनगर में रविवार को हुए संत सम्मेलन में गोवंश का रक्षा, गंगा निर्मलीकरण के साथ ही जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाया गया।
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Prayagraj : माघ मेला क्षेत्र स्थित घनश्यामाचार्य के शिविर में रविवार को संत सम्मेलन का आयोजन किया - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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माघ मेला के सेक्टर पांच स्थित आचार्यबाड़ा रामानुजनगर में रविवार को हुए संत सम्मेलन में गोवंश का रक्षा, गंगा निर्मलीकरण के साथ ही जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाया गया। इस दौरान गंगा को निर्मल बनाने के लिए साधु-संतों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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संतों ने एक स्वर से कहा कि केंद्र सरकार को भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। गंगोली शिवाला मार्ग अन्नपूर्णा चौराहा स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर अलोपीबाग के शिविर में बैकुंठवासी स्वामी गोविंद रामानुजाचार्य गोकर्णाचार्य की 29वीं पुण्यतिथि पर हुए संत सम्मेलन में राष्ट्रीय मुद्दों पर चिंतन किया गया। खास तौर से गंगा, गोवंश पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

रामानुज प्रबंध समिति आचार्यबाड़ा के कोषाध्यक्ष जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य के सानिध्य में हुए इस संत सम्मेलन में गोवंश की रक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, धर्मांतरण,समान नागरिक संहिता,देश के भविष्य युवाओं में मादक पदार्थों के प्रति जागरूकता अभियान जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र व प्रदेश सरकारों का ध्यान खींचा गया। घनश्यामाचार्य ने कहा कि गंगा देश की प्रधान नाड़ी है। इसे कमजोर करने से होने वाली क्षति की भरपाई नहीं की जा सकेगी। युवाओं को नशे की चपेट से बचाने के लिए उन्होंने ठोस कार्यनीति बनाने का सरकार से आग्रह किया।

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उनका कहना था कि मादक पदार्थों के तस्कर युवाओं को नशे का आदी बनाकर उनका इस्तेमाल करके दलदल में धकेल रहे हैं। नशा का मतलब है जो नष्ट कर दे। इस दौर में नशे की वजह से परिवार बर्बाद हो रहे हैं। समाज में बढ़ते अपराधों की सबसे बड़ी वजह नशा ही है। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे टीकरमाफी मठ के महंत स्वामी हरिचैतन्य ब्रम्हचारी का कहना था कि धर्मांतरण जैसे आपराधिक षडयंत्र की वजह से अखंड भारत पहले टूट चुका है। इसलिए अब उसकी पुनरावृत्ति करने की योजना बनाने वालों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है। इस मौके पर जगदगुरु रामानुजाचार्य विद्या भास्कर, श्रीधराचार्य, रामेश्वराचार्य, स्वामी चक्रपाणि जी महाराज, स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी,स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य, स्वामी कुरेशाचार्य, कौशल प्रपन्न स्वामी राजारामाचार्य समेत कई साधु-संत उपस्थित थे।

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