अपनी मर्जी से शादी करने वाले जोड़ों को शादी कराने वाली संस्थाओं द्वारा प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा है कि ऐसा कौन सा कानून है, जिससे इन संस्थाओं को प्रमाणपत्र देने का अधिकार है। कोर्ट ने इलाहाबाद के कटघर स्थित धार्मिक संस्कार केंद्र से इस बाबत स्पष्टीकरण मांगा है। यह भी कहा है कि संस्था का एक पदाधिकारी अगली सुनवाई की तिथि 23 फरवरी को अदालत में मौजूद रहे।
सोनिया शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने यह आदेश दिया। याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की थी। उसने अपने हलफनामे में कहा कि वह दोनोें बालिग हैं तथा उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह किया है। प्रमाण के तौर पर धार्मिक संस्कार केंद्र द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया। अदालत ने इस पर सवाल उठाया कि किस कानून के तहत ऐसी संस्थाओं को विवाह का प्रमाणपत्र देने का अधिकार है।