इलाहाबाद। इलाहाबाद के संगम तट पर इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन (इसरो) ने सरस्वती नदी बहने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती के मुताबिक राजस्थान और हरियाणा में इस बात के पहले ही साक्ष्य मिल चुके हैं। अब इलाहाबाद की बारी है। हालांकि इसके लिए अभी छह महीने का इंतजार करना पड़ेगा। अभी कुछ और साक्ष्यों की जरूरत है। इसके बाद ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इलाहाबाद के सर्किट हाउस में ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देने आईं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने संवाददाताओं को बताया कि इलाहाबाद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम है। लंबे समय से इस सरस्वती नदी को खोजने का काम चल रहा था। वर्ष 2002 में इसके लिए ‘प्रोजेक्ट सरस्वती ’ बना। ग्रांउड वाटर बोर्ड और इसरो इस दिशा में काम भी कर रहे हैं। संयोग से ग्रांउड वाटर बोर्ड का मंत्रालय मेरे ही पास है।
मंत्री बनने के बाद मैने इस दिशा में सरस्वती नदी की खोज के काम में तेजी लाने को कहा। इस दौरान इसरो की मदद से इलाहाबाद किले में जो सरस्वती कूप है कि उसमें सरस्वती नदी की धारा की वास्तविकता जानने के लिए काम करने को कहा गया। इसरो ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि कूप में सरस्वती की धारा हो सकती है। अब स्पेस टेक्नोलॉजी की मदद से अगर जल की धारा मिल जाती है तो यह देखा जाएगा कि वह धरती के कितने नीचे है। फिलहाल अभी प्राइमरी रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। उन्होंने बताया कि इसके पहले हरियाणा और राजस्थान में भी इस नदी की धारा मिलने के साक्ष्य मिले हैं।