प्रयागराज। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में अब संगम नगरी में बने लूम का इस्तेमाल होगा। नैनी स्थित हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की स्वाधिकृत सहायक संस्था नैनी एयरोस्पेस लिमिटेड (एनएएल) इसरो द्वारा बनाए जाने वाले तमाम सेटेलाइट के लांच व्हीकल में लगने वाले लूम को तैयार करेगा। इस संबंध में नैनी एयरो स्पेस और इसरो में वार्ता हो चुकी है।
दरअसल नैनी स्थित नैनी एयरोस्पेस लिमिटेड (एनएएल) में सेना के उपयोग में आने वाले ध्रुव हेलीकॉप्टर का ढांचा पिछले वर्ष से बन रहा है। इसके अलावा यहां सभी तरह के लूम (तारों का गुच्छा) भी तैयार किए जा रहे हैं। अभी तक यहां मिलिट्री एयरक्राफ्ट के ही लूम बनाए जा रहे थे, लेकिन पिछले वर्ष ही एनएएल को एयरबस और बोइंग एयरक्राफ्ट के लूम बनाने का एएस 9100 डी सर्टिफिकेट मिल गया।
क्या है लूम
पतले तारों के गुच्छे को ही लूम कहते हैं। यह कनेक्टर्स के माध्यम से बनाए जाते हैं। इसे एयरक्राफ्ट का तंत्रिका तंत्र भी कहा जाता है। इससे विमान की विभिन्न प्रणालियों का संचालन होता है। अब यहां बने लूम का इस्तेमाल इसरो भी करेगा। इसके लिए इसरो की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के सीएमडी की नैनी एयरो स्पेस लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रजनीकांत मिश्र से पिछले दिनों मुलाकात भी हुई। रजनीकांत मिश्र ने बताया कि न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के सीएमडी ने नैनी में बनाए जा रहे लूम को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है। इसका उपयोग सेटेलाइट के लांच व्हीकल में इसरो करेगा। इस संबंध मेें अब सभी औपचारिकताएं पूरी किए जाने की बात चल रही है।
ध्रुव हेलीकॉप्टर के डिलीवर हुए छह सेट
नैनी एयरोस्पेस लिमिटेड (एनएएल) ने सेना के उपयोग में आने वाले ध्रुव हेलीकॉप्टर के छह ढांचाें की डिलीवरी कर ली है। अब कंपनी को चार अन्य ढांचों के निर्माण का आर्डर मिला है। खास बात ये है कि एनएएल ने उन कर्मचारियों से ध्रुव हेलीकॉप्टर का ढांचा तैयार करवाया है जो पूर्व में वर्षों से बंद पड़ी हिंदुस्तान केबिल्स लिमिटेड (एचसीएल) के कर्मचारी थे। विशेष ट्रेनिंग के बाद अब ये कर्मचारी ध्रुव हेलीकॉप्टर का ढांचा बनाने में पारंगत हो गए हैं।