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इसरो के चेयरमैन बोले : इसरो की आज जो उपलब्धि है, वह भारत के प्राचीन ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों की देन

Sun, 09 Feb 2025 09:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि यहां आकर मुझे आदिगुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद मिला। यह मेरे लिए प्रसन्नता का विषय है, इसरो देश की सेवा के लिए प्रसिद्ध है।
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इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन एकात्म धाम पहुंचे, अद्वैत लोक प्रदर्शनी का किया अवलोकन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि यहां आकर मुझे आदिगुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद मिला। यह मेरे लिए प्रसन्नता का विषय है, इसरो देश की सेवा के लिए प्रसिद्ध है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले पहले देश बने और वहां पानी के संकेत ढूंढने में सफल हुए। इसरो की आज जो उपलब्धि है, वह भारत के प्राचीन ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों की देन है। आगामी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, नए लॉन्चर्स और लॉन्चपैड्स जैसे कई प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे। इस पर कार्य चल रहा है।

वह रविवार को एकात्म धाम शिविर पहुंचे। उन्होंने अद्वैत लोक प्रदर्शनी को देख और प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसरो चेयरमैन ने मध्यप्रदेश शासन के एकात्म धाम प्रकल्प की सराहना करते हुए कहा जो कार्य मध्यप्रदेश सरकार कर रही है, वह सचमुच प्रशंसनीय है। लड़कर नहीं अपितु एकात्मता के माध्यम से मानवता को जोड़कर एक विकसित राष्ट्र का संकल्प पूर्ण होगा। उन्होंने कहा इसरो के सभी 20 हजार कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता के साथ देश की सेवा के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के इस प्रयास के प्रति आभार जताया।

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व्यक्तिगत उपलब्धियों से पहले राष्ट्र को दें प्राथमिकता

हर व्यक्ति को व्यक्तिगत उपलब्धियों से पहले अपने संगठन और राष्ट्र को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह बात इसरो के अध्यक्ष व अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायण ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में छात्रों से कही।

डॉ. वी. नारायण के साथ सतीश धवन अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक डॉ. ए. राजराजन ने भी संकाय सदस्यों व छात्रों के साथ बातचीत की। दोनों यहां महाकुंभ की यात्रा पर आए थे और इस दौरान एमएनएनआईटी भी पहुंचे। डॉ. वी. नारायणन ने इसरो की दूरदृष्टि और हाल के वर्षों में इसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें मंगल मिशन और चंद्रयान-1, 2 व 3 की अभूतपूर्व सफलताएं शामिल थीं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान सरकार इसरो को अंतरिक्ष मिशनों में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने के लिए सकारात्मक है, जिसमें अधिकतम विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण और जलवायु परिवर्तन के लिए जी-20 उपग्रह का विकास शामिल है। डॉ. ए. राजराजन ने भी स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष यान प्रक्षेपण में भारत की आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

संकाय सदस्यों व छात्रों के साथ हुई बैठक में दोनों वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव भी साझा किए। संकाय सदस्यों और छात्रों ने इसरो टीम को अपने शोध समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। एमएनएनआईटी के निदेशक प्रो. आरएस वर्मा ने दोनों वैज्ञानिकों का स्वागत हुए उन्हें उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए। बैठक में प्रो. आरपी तिवारी, प्रो. अभिषेक कुमार, डॉ. रामजी द्विवेदी, डॉ. अभिषेक तिवारी, डॉ. सतीश, डॉ. धीरज आहूजा आदि मौजूद रहे।

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