इलाहाबाद (ब्यूरो)। संस्था संचारी इलाहाबाद की ओर से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक पर्व के दूसरे दिन कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे अभिनेता तिग्मांशु धुलिया ने लेखकों, वैज्ञानिकों, कलाकारों की ओर से किए जा रहे विरोध को जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि लेखकों के पास विरोध करने का यही ठीक और बेहतर माध्यम है। इसको विरोध के तौर पर नहीं बल्कि सकारात्मक तौर लेना चाहिए।
उन्होंने लेखकों, वैज्ञानिकों का विरोध करने पर अभिनेता अनुपम खेर के आंदोलन को भी गलत बताया। कहा कि लेखकों ने अगर कश्मीरी पंडितों को लेकर कोई आंदोलन नहीं किया, कोई बात नहीं बोली, तो यह गलती कर दी, लेकिन अब उस गलती को वह दोहराना नहीं चाहते हैं। इसलिए तो विरोध कर रहे हैं। सरकार को इसे सकारात्मक तौर पर लेना चाहिए। उनकी बातों को सुनना चाहिए और देश और समाज के माहौल को सुधारने के लिए बेहतर कदम उठाने चाहिए। लेखक, वैज्ञानिक अगर ऐसी बातें कह रहे हैं तो यह बड़ी बात है। कुछ महीनों में देश में एक अजीब सा माहौल बन गया है। बेवजह के मामलों को तूल दिया जा रहा है।
अब लेखक, वैज्ञानिक तो सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा नहीं। उसके विरोध का तरीका यही हो सकता है। लेखकों के विरोध का प्रतिरोध गैरवाजिब है और अभिनेता अनुपम खेर को ऐसा नहीं करना चाहिए। देश और समाज के बारे में सोचना, उसका ख्याल रखना लेखक, वैज्ञानिक, कलाकार बहुत ही मजबूती से जानता और समझता है। उसे अपनी बात कहने का पूरा हक है और पूरी आजादी है।
हालांकि तिग्मांशु ने कहा कि उन्हें जो पुरस्कार मिला है, उसे वह वापस नहीं करेंगे, लेकिन लेखकों, वैज्ञानिकों और कलाकारों की ओर से असहिष्णुता के माहौल को देखते हुए विरोध के स्वरूप को जायज ठहराया। इस दौरान उन्होंने अपनी आने वाली फिल्मों के बारे में भी चर्चा की। कहा कि उनके द्वारा निर्देशित फिल्म ‘यारा’ आने वाली है। उसमें वह रोल भी निभा रहे हैं।