वह अपने परिवार के साथ एक दशक से ईरान के कुम शहर में रह रहे हैं। कुम में भी हमला हुआ है, लेकिन शहर अभी सुरक्षित है। कुम के बाहरी हिस्से में हमले ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। वहां की सरकार ने गाइडलाइन जारी की है। लोग घर में ही नमाज और दुआ कर रहे हैं। इसी तरह ईरान के कुम शहर के एक मदरसे में अरबी-फारसी की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे भोपतपुर हंडिया निवासी कुशा अली के परिवार के लोग भी उनकी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
भोपतपुर हंडिया निवासी मोहम्मद कैफी भी ईरान के कुम शहर में रहकर एक मदरसे में अरबी-फारसी की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, प्रयागराज में शिया समुदाय के प्रख्यात स्कॉलर रहे मौलाना जीशान हैदर जवादी के नवासे सज्जाद हैदर भी ईरान के कुम शहर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दमगढ़ा हंडिया के मोहम्मद रिजवान भी ईरान में फंसे हैं। इन सभी लोगों के परिवार वाले इनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उनका पूरा दिन टीवी के सामने समाचार देखने में बीत रहा है।