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प्रयागराज : डिजिटल अरेस्ट कर 1.48 करोड़ की ठगी में आईपी कॉल का इस्तेमाल, इंटरनेट कॉल खंगालने में जुटी पुलिस

Mon, 29 Apr 2024 04:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाई प्रोफाइल मामला होने के चलते पुलिस भी तेजी से इस मामले के खुलासे में जुट गई है। फिलहाल हुई जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि साइबर ठगों ने महिला से संपर्क करने के लिए नॉर्मल कॉल की जगह आईपी कॉल का इस्तेमाल किया।
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फ्रॉड केस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जार्जटाउन में डिजिटल अरेस्ट कर अफसर की पत्नी काकोली दासगुप्ता (68) से 1.48 करोड़ की ठगी में आईपी( वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) काॅल का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस अब उस आईपी एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है, जिसके जरिए यह कॉल की गई। साथ ही उस बैंक खाते की भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें रकम ट्रांसफर कराई गई।

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हाई प्रोफाइल मामला होने के चलते पुलिस भी तेजी से इस मामले के खुलासे में जुट गई है। फिलहाल हुई जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि साइबर ठगों ने महिला से संपर्क करने के लिए नॉर्मल कॉल की जगह आईपी कॉल का इस्तेमाल किया। इस तरह की कॉल इंटरनेट के जरिए की जा सकती है और इसके लिए कॉल करने वाले के पास फोन का होना जरूरी नहीं है। फिलहाल पुलिस वह आईपी एड्रेस ट्रेस करने में जुटी है, जिस पर चल रहे इंटरनेट कनेक्शन से यह कॉल की गई।

उधर उन दो बैंक खाताें के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें महिला से रकम जमा करवाई गई। इनमें से एक खाता एसबीआई व दूसरा खाता यस बैंक का है। इन्हीं में से एक खाते में भेजी गई 40 लाख की रकम को तत्परता दिखाते हुए होल्ड करा दिया गया। यह खाते किन केवाईसी पर लिए गए, पुलिस उसका पता लगाने में जुटी है। बैंक से संपर्क कर यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं इन खाताें से बाकी की रकम अन्य खातों में तो ट्रांसफर नहीं कराई गई। फिलहाल इस मामले में पुलिस अभी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। अफसरों का कहना है कि जांच की जा रही है।
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यह है पूरा मामला

यह प्रयागराज का पहला केस है जिसमें महिला को डिजिटल अरेस्ट कर उससे साइबर ठगी की गई। वादिनी का आरोप है कि उनके नाम पर ड्रग्स, लैपटॉप व क्रेडिट कार्ड वाला पार्सल ताइवान भेजने की बात कहकर पहले इंटरनेशनल कूरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर एक व्यक्ति ने संपर्क किया। पार्सल के बारे में जानकारी न होने की बात कहने पर शिकायत दर्ज कराने को कहा। फिर पुलिस अफसर बनकर एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल पर बात की और डरा-धमकाकर रकम खातों में जमा करवा लिए।
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