क्या कभी कोई सोच सकता था कि नारी की स्वाधीनता पर खुलकर बात रखने वाली कोई नारी हो सकती हैं, जिस ने विश्व फलक पर बेबाक तरीक़े से नारी की आज़ादी को लेकर अपनी बात रखी वह थीं। प्रसिद्ध पुस्तक " द सेकेंड सेक्स " की लेखिका सिमोन द बुआ, जिनके विचारों को अपने किसी रक्त संबंध का साथ नहीं मिला था बल्कि अपने ही एक पुरुष मित्र का वैचारिक समर्थन उन्हें मिला, जो उनका आत्मबल सिद्ध हुआ। स्वामी विवेकान्द ने कहा था जब तक महिलाओं की स्थिति नहीं सुधरती तब तक विश्व कल्याण की बात सोचना बेमानी होगा।