फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईमानदारी, जुनून है डिब्बा वालों की सफलता का राज

Mon, 12 Oct 2015 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। मुंबई के डिब्बा वालों का विश्व में एक खास मुकाम है। इसके पीछे उनका काम के प्रति जुनून, ईमानदारी तथा अध्यात्मिक शक्ति है। इसी जज्बा से प्रेरित होकर इन पर पीएचडी करने वाले प्रख्यात मोटिवेटर डॉ.पवन अग्रवाल ने रविवार को डिब्बा वालों की कहानी बताकर मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा और लगन से काम करने की नसीहत दी। संस्थान में शुरू पांच दिवसीय तकनीकी महोत्सव ‘अविष्कार-2015’ में बतौर मुख्य वक्ता पहुंचे डॉ.पवन ने डिब्बा वालों की 125 साल की कहानी बयां कीं।
विज्ञापन


डॉ.पवन ने कहा कि डिब्बा वाले ग्राहक को भगवान तथा खुद को अन्नदाता समझते हैं। 90 प्रतिशत से अधिक डिब्बा वाले बिट्ठल भगवान की आराधना करते हैं। मांस, शराब आदि का सेवन नहीं करते। इससे उनमें अध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है। डिब्बा वालों के एसोसिएशन में कोई मालिक या नौकर नहीं है। ये सब उनके सफलता का मंत्र है। डॉ.पवन ने डिब्बा वालों की पूरी कहानी बताकर छात्र-छात्राओं को कड़ी मेहनत, ईमानदारी की नसीहत दी। उन्होंने विद्यार्थियों को धैर्य की भी नसीहत दी। बताया कि डिब्बा वालों को भी विश्व में पहचान बनाने में 100 साल लग गए।

 उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग या हर तरह के समान की डिलेवरी सिस्टम में डिब्बा वालों, घर-घर अखबार तथा दूध पहुंचाने वालों को जोड़नेे की मांग की। डॉ.पवन अग्रवाल ने बताया कि वे मुंबई में तीन स्कूल चला रहे हैं। उनमें केजी से परास्नातक की पढ़ाई होती है। बीबीए और एमबीए की भी पढ़ाई होती है। डिब्बा वालों के बच्चाें को उन स्कूलों में मुफ्त पढ़ाया जाता है। 15 अक्तूबर तक चलने वाले इस समारोह में मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित संस्थान के पुराछात्र संजीव चतुर्वेदी सोमवार को विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे।
विज्ञापन


अविष्कार में पहले दिन एयर शो मुख्य आकर्षण रहा। शिक्षकों तथा सेना के अफसरों के निर्देशन में विद्यार्थियों ने मॉडल प्लेन उड़ाए। इस मौके पर शिक्षकों के अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्रा मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें