दो स्तर पर होगी जांच
केंद्र पर अभ्यर्थियों की दो स्तर पर जांच होगी। पहले गेट पर ही पुलिस कर्मी हर अभ्यर्थी का निरीक्षण करेंगे। गेट पर एजेंसी के प्रतिनिधि अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी करेंगे। इसके तहत रेटिना का मिलान किया जाएगा। इसके बाद केंद्र परिसर में परीक्षण किया जाएगा।
कंट्रोल रूम में बढ़ाई स्क्रीन की संख्या
आयोग परिसर में एआई तकनीकी से लैस कंट्रोल रूम का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा केंद्र के हर कक्ष में भी कैमरे लगाना अनिवार्य है जो जिला स्तर पर बने एनआईसी के माध्यम से आयोग के कंट्रोल रूम से कनेक्ट होंगे। कंट्रोल में जिलेवार स्क्रीन की संख्या भी तीन गुना तक बढ़ा दी गई है। आयोग के अफसर के अनुसार अब तक हर जिले के लिए एक या दो स्क्रीन होते थे। इससे किसी सेंटर की दोबारा पिक्चर आने में आधे घंटे से भी अधिक समय लग जाता था। अब हर पांच मिनट में सेंटर के लोकेशन रोटेट होते रहेंगे। इससे निगरानी और मजबूत होगी।
अभ्यर्थी ने गर्दन भी घुमाई तो आएगा अलर्ट
आयोग का कंट्रोल रूम एआई तकनीकी से लैस है। इसकी मदद से परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी के किसी भी मूवमेंट पर अलर्ट आ जाएगा। यहां तक कि गर्दन भी हिलाई तो अलर्ट जारी हो जाएगा। आयोग की ओर से इसी अलर्ट के आधार पर एजेंसी को भुगतान भी किया जाएगा। आयोग के अफसरों के अनुसार कक्ष में 20 से 40 अभ्यर्थी होते हैं। ऐसे में लगातार हलचल स्वाभाविक है और यह सिस्टम इतना सेंसेटिव है कि हर हलचल का अलर्ट जारी करेगा। ऐसे में लगातार अलर्ट आते रहना चाहिए। यदि किसी सेंटर से अलर्ट नहीं आता है तो सतर्कता बढ़ा दी जाएगी। इसके अलावा एजेंसी के भुगतान में भी कटौती की जाएगी।
संबंधित जिलों में भेजे गए आयोग के प्रतिनिधि
आयोग की ओर से हर जिले के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किए जाते हैं जो जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर हर केंद्र पर गाइडलाइन एवं परीक्षा के मानकों को सुनिश्चित कराते हैं। अफसरों, कक्ष निरीक्षकों को प्रशिक्षण भी उनकी निगरानी में दिया जाता है। पूर्व की परीक्षाओं में आयोग के प्रतिनिधि परीक्षा से तीन दिन पहले जिलों में भेजे जाते थे लेकिन पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में एक सप्ताह पहले ही सभी प्रतिनिधि पहुंच गए हैं।