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प्रयागराज : सपा विधायक विजमा यादव पर 21 वर्ष पूर्व दर्ज मामले में इंस्पेक्टर का बयान दर्ज

Tue, 11 Oct 2022 09:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एमपीएमएलए की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ल के समक्ष सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य ने शपथ पूर्वक 11 वें गवाह का बयान दर्ज कराया।अदालत को पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि विधायक विजमा यादव के उकसाने पर ही भीड़ अनियंत्रित होकर पुलिस टीम पर गोली बम से हमला किया।
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Prayagraj News : विजमा यादव, पूर्व विधायक। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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सपा विधायक विजमा यादव सहित 14 सहयोगियों के खिलाफ 21 वर्ष  पुराने मामले में एमपी एमएलए की विशेष कोर्ट में मंगलवार को नवाबगंज थाना  के तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर महेंद्र प्रताप सिंह की गवाही दर्ज की गई। मामले में अब तक अभियोजन ने 11 गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज कराए हैं। यह सभी घटना में घायल हुए थे। तत्कालीन इंस्पेक्टर सरायनाइत कृपा शंकर दीक्षित की मृत्यु हो चुकी है।

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एमपीएमएलए की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ल के समक्ष सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य ने शपथ पूर्वक 11 वें गवाह का बयान दर्ज कराया।अदालत को पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि विधायक विजमा यादव के उकसाने पर ही भीड़ अनियंत्रित होकर पुलिस टीम पर गोली बम से हमला किया। जिसमें हम घायल हुए थे। घटना में विजमा यादव शामिल थीं।


मामले में अब तक विष्णु दत्त दुबे तत्कालीन इंस्पेक्टर थरवई, कमालुद्दीन हेड कांस्टेबल, महेंद्र प्रकाश सिंह कांस्टेबल, द्वारिका प्रसाद यादव कांस्टेबल, कड़े दीन यादव पीएसी बल, लालमणि सिंह पीएसी, मुनीश कुमार सिंह कांस्टेबल, सुशील कुमार तिवारी कांस्टेबल, महेंद्र प्रताप सिंह कांस्टेबल, प्रेम प्रकाश शुक्ल पीएसी का अदालत के समक्ष बयान दर्ज करा चुका है। विशेष अदालत में विधायक विजमा यादव, शिवदास, विनोद, पवन, शिव प्रताप, अभय राज, चंद्र प्रकाश, अशोक पाल, दुर्गेश सिंह, राजू सिंह, जगन्नाथ, श्याम बाबू, हरिलाल  व जंग बहादुर पर इस मामले में आरोप लगाए गए हैं।

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जानें क्या था पूरा मामला

आरोप है कि उन्होंने 21 सितंबर 2000 को दोपहर 2.30 बजे चौकी सहसों के सामने श्याम बाबू के पुत्र आनंद जी उर्फ छोटू सात वर्ष के बालक की दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर उसके शव को सड़क पर रखकर ईंट-बल्ली लगाकर नाजायज तरीके से मजमा लगाकर बलवा किया। सभी लोग घातक असलहों से लैस थे। थाना प्रभारी थाना सराय इनायत कृपाशंकर दीक्षित व अन्य पुलिस अधिकारियों को जान से मारने की नियत से ईंट, पत्थर फेंके, जाम लगाकर सड़क पर अवरोध उत्पन्न किया। जिससे कि लोगों को आने जाने में अवरोध हुआ। आम आदमी के जीवन को संकट में डाल दिया। पुलिसकर्मियों को अपना कर्तव्य निर्वहन करने से रोकने के लिए भय पहुंचाया। उनको चोटें पहुंचाईं, लोक शांति भंग करने के आशय से अपमानित किया। सरकारी कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी। सड़क पर खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त किया। लोक सेवक के आदेश की अवहेलना की। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया एवं लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई।
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