Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच।
- फोटो : प्रयागराज
संगम की माटी से मिली प्रेरणा से खिलाड़ियों में जोश भरा और ओलंपिक में पदक मिला। टोक्यो ओलंपिक की शुरुआत में ही टीम की बैठक में खिलाड़ियों से कहा था कि यहां आप सिर्फ नाम के आगे ओलंपियन लिखाने नहीं आए हैं। ओलंपियन तो कई रहें हैं। इसे कोई याद नहीं रखेगा। मेडल मिला तो इतिहास में दर्ज होगा नाम। आपको सिर्फ मेडल दिखे, इससे कम कुछ भी नहीं। मेडल मिल गया तो आपका हर वो सपना पूरा होगा, जो अभी तक आपने देखा था। इसलिए आप अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख पर नजर रखें। यह कहना था टोक्यो ओलंपिक में पुरुष हॉकी टीम के सहायक कोच पीयूष दुबे का।
Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच।
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अमर उजाला कार्यालय में बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी का भविष्य बहुत ही स्वर्णिम है। सरकार की खेलो इंडिया योजना बहुत अच्छी है। यह खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचान कर उनकों तराशेगी। इससे निश्चित तौर पर हम कह सकते हैं कि खेलों का भविष्य उज्ज्वल है। पहले साई और फेडरेशन अलग-अलग काम करते थे। अब इनके बीच समन्वय बनाया गया है। सरकार भी खेलों पर विशेष ध्यान दे रही है।
खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बस उन्हें बेहतर संसाधन और उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए सिर्फ सरकार को ही दोष देना ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज आते समय रायबरेली में खेल अफसरों ने कहा कि हम भी सम्मान करेंगे। बातचीत के दौरान पता चला कि वहां टर्फ है, लेकिन किट और अन्य संसाधन का अभाव है। ऐसे में वहां मौजूद लोग आगे आए। लोगों ने कहा खिलाड़ियों के नाश्ता का प्रबंध हम करेंगे। व्यापारी और इंजीनियर वर्ग के लोगों ने कहा कि किट हम उपलब्ध कराएंगे। इसलिए समाज का जाग्रत होना बहुत जरूरी है।
Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच।
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सम्मान की संजीवनी मिली प्रयाग में,
हॉकी कोच पीयूष दुबे ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने के बाद देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने सम्मानित किया। लेकिन सम्मान की संजीवनी प्रयागराज में मिली। संगमनगरी की मिट्टी छूते ही महीनों की थकान दूर हो गई। अपनी कर्म भूमि में सम्मान पाकर अभिभूत हूं। मेरे पास शब्द नहीं हैं कि कैसे इस शहर का शुक्रिया कर सकूं।
खेल को कॅरियर नहीं, इंज्वॉय करें खिलाड़ी
कोच पीयूष दुबे ने कहा कि खेल को खिलाड़ी कॅरियर की तरह न ले। खेल को इंज्वॉय की तरह लें। इसका लुत्फ उठाएं और तनाव मुक्त होकर बेहतर प्रदर्शन पर ही नजर रखें। निश्चित तौर पर इससे आप खेल में बेहतर प्रदर्शन करेंगे और सफल होंगे। तब आपका कॅरियर भी बन जाएगा। पीयूष ने कहा कि ऐसा कठिन और स्पेशल ओलंपिक दोबारा नहीं होगा। इस पर भी असमंजश था कि आयोजन होगा भी कि नहीं।
पीएम की कॉल पर टूटा ड्रेसिंग रूम का सन्नाटा
कोच पीयूष दुबे ने बताया कि सेमीफाइनल में हार के बाद टीम ड्रेसिंग रूम में थी। सभी उदास थे। मीटिंग होनी थी लेकिन सब चुप थे। वो शब्द नहीं थे। जिससे हम आगे की रणनीति पर चर्चा शुरू कर सकें। तभी एक सदस्य ने आकर कहा कि पीएम मोदी आप से बात करना चाहते हैं। उस समय साफ सुन नहीं सका। जब दोबारा कॉल आई तो पता चला कि पीएम मोदी बात करेंगे। तब मैने स्पीकर ऑन कर दिया। उन्होंने कहा कि हमें आप सब पर पूरा भरोसा है। आप पदक जीतोगे। पीएम के इस संबोधन ने हमें नई ऊर्जा दी और ड्रेसिंग रूम की चुप्पी टूटी। तब कप्तान ने बोलना शुरू किया और खिलाड़ियों को अपने शब्दों से जोश और जीतने का विश्वास पैदा किया। आखिरकार हम पदक जीते।
जीत में 16 नहीं 33 खिलाड़ियों का योगदान
कोच पीयूष दुबे ने कहा कि इस जीत में सिर्फ 16 खिलाड़ियों का योगदान नहीं है, इसमें 33 खिलाड़ियों का योगदान है। ये वो खिलाड़ी रहे जो ओलंपिक टीम में चयनित होने के प्रबल दावेदार रहे। लेकिन चयन नहीं हुआ। उनका ही योगदान रहा कि चुने गए खिलाड़ियों को इसके लिए कड़ी मेहनत और इस काबिल बनने के लिए मजबूर किया। उनके योगदान को भूला नहीं जा सकता है। टीम चयन के बाद मीटिंग में यह बात रखी गई थी कि टीम जीती तो भले ही मेडल 16 में आएगा लेकिन जाएगा 33 खिलाड़ियों में। जो खिलाड़ी टीम में चयन से वंचित रहे वो भी समय-समय पर वीडियो कॉलिंग और बातचीत के जरिए टीम का हौसला बढ़ाते रहे।