मंगलवार को भारतीय सेना के पराक्रम की खबर सुनकर सेना के रिटायर्ड सैनिकों के चेहरे चमक उठे। कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके तमाम सैनिक रिटायर होने के बाद प्रयागराज में रह रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में इन पूर्व सैनिकों ने सैन्य कार्रवाई को जरूरी बताया हालांकि उनका यह भी कहना था कि युद्ध पहला विकल्प नहीं होता लेकिन, दुश्मन को उसकी भाषा में जवाब देना बहुत जरूरी था। भारतीय सेना की यह कार्रवाई दुश्मनों तक गहरा संदेश देगी।
कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके रिटायर्ड सूबेदार मेजर पीएन ओझा का कहना है इस कार्रवाई से सेना की ताकत पता चलती है। ऐसी स्ट्राइक वर्ल्ड लेवल पर भी आसान नहीं। इसे सुनकर हमें गर्व हुआ कि हम लोग भी उसी संस्था से जुड़े रहे लेकिन युद्ध कभी भी पहला विकल्प नहीं हो सकता। युद्ध होने पर दोनों पक्षों का नुकसान है। आज का दौर पुरानी राइफलों का नहीं है लेकिन, जो हालत पैदा किए गए उसमें यह कार्रवाई जरूरी थी।
कारगिल सेनानी सूबेदार आईसी तिवारी इसे सेना की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है हिंदुस्तान हमेशा से रक्षात्मक रहा लेकिन अबकी बार उसने आक्रामक रवैया अख्तियार किया। उनका मानना है कि युद्ध पड़ोसियों के विवाद में आखिरी रास्ता नहीं है लेकिन जब तक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का सफाया नहीं होता बात आगे नहीं बढ़ सकती। रिटा. सूबेदार मेजर एसएन मिश्र सेना की कार्रवाई को मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम बताते हैं। उनका कहना है इस कार्रवाई से सेना ने दुश्मनों को तगड़ा संदेश दिया है।
उनका कहना है कि जब हमारे जवान रोज मारे जा रहे हैं तब निर्णायक लड़ाई लड़नी जरूरी हो जाती है। रिटा.सूबेदार मेजर आरपी चौहान ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा सेना ने कार्रवाई करके पूरे देश के नागरिकों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। एक पूर्व सैनिक के नाते उनको अपने संगठन पर गर्व है। रिटायर्ड सूबेदार श्यामसुंदर सिंह पटेल ने सेना की कार्रवाई को साहसपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि कई दिनों की तैयारी के बाद इस तरह के आपरेशन अंजाम दिए जाते हैं।