सीएसी के तहत डेवन्स, लिबरेटर्स, पैकेट, जीएनएटी, वैम्पायर, डकोटा, कैनबरा, बेल जी2 और जी3एम, एसयू-7 और एसयू-30 एमकेआई, जगुआर, मिराज-2000, मिग शृंखला के एसी, एवीआरओ, एएन-12 और एएन-32, आईएल-76 और आईएल-78 एमकेआई, चेतक, चीता, एमआई-4 जैसे विमानों का संचालन हो चुका है। कमान के पास वर्तमान में मौजूद विमान किसी भी लक्ष्य को तलाशने, उस पर हमला करने और उसे नष्ट करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, सीएसी में विभिन्न वायु रक्षा रडार और सतह से हवा में मार करने वाली तमाम आधुनिक मिसाइलें भी हैं। इस वजह से यहां भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्राकृतिक आपदाओं में चुनौतियों का सामना
नेपाल में आया हुआ भूंकप हो या फिर बिहार की बाढ़। ऐसी तमाम आपदाओं के समय मध्य वायु कमान ने चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। आपदाओं में राहत कार्यों में सीएसी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में बाढ़ राहत, ओडिशा में चक्रवात आने के बाद वहां राहत बचाव कार्य में सीएसी आगे रहा है।
‘दमनीयः आत्मशत्रवः’ मध्य वायु कमान का आदर्श वाक्य है। इसका अर्थ है शत्रु का दमन करो। शत्रु का दमन करने में मध्य वायु कमान हमेशा आगे रहा है। - समीर गंगाखेड़कर, ग्रुप कैप्टन एवं पीआरओ रक्षा मंत्रालय