prayagraj news : दांडी यात्रा नमक के नीलामी के दस्तावेज।
- फोटो : prayagraj
इलाहाबाद संग्रहालय में दांडी के नमक की नीलामी से जुड़े दस्तावेज भी सुरक्षित हैं। नीलामी दस्तावेज के मुताबिक 6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के अपने सहयोगियों के साथ इस नमक को बनाया था। साबरमती आश्रम से 24 दिन की यात्रा कर पांच अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी अपने समर्थकों के साथ अंग्रेजों के नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी पहुंचे थे।
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इस यात्रा के जरिए बापू ने समुद्र के किनारे बसे शहर दांडी में औपनिवेशिक भारत में नमक बनाने के लिए अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाले कानून को तोड़कर और नमक बनाया था। नमक सत्याग्रह समाप्त होने के बाद उस नमक के दो पैकेट इलाहाबाद गए गए थे। यहां लाए गए बापू के बनाए दांडी के नमक की नीलामी कराई गई थी। तब उस नमक को शहर के ही एसके दर ने अपने मित्र की मदद से छह सौ रुपये की बोली लगाकर ले लिया था।
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बाद में उस नमक को इलाहाबाद संग्रहालय को दान दे दिया गया। फिलहाल संग्रहालय में दांडी का वह नमक एक शीशी में सुरक्षित रखा गया है। इस नीलामी से जुड़े तीन दस्तावेज भी संग्रहालय ने रखे हुए हैं। जिसमें दांडी से इलाहाबाद नमक लाए जाने से लेकर नीलामी प्रक्रिया तक का तिथिवार विवरण दिया गया है। इस नमक सत्याग्रह केदौरान 8,000 भारतीयों को जेल में डाल दिया गया था जिसमें इलाहाबाद के भी कई क्रांतिकारी शामिल थे। संग्रहालय निदेशक डॉ सुनील गुप्ता का कहना है कि दांडी का नमक संग्रहालय की अनमोल धरोहरों में से एक है। इसे गांधी पर आधारित प्रदर्शनी के दौरान शो केश में लगाया गया था।
मौजूदा समय गांधी बीथिका का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद उस नमक को गांधी बीथिका में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि देश-दुनिया के पर्यटक उसे देखने के साथ ही उन पुराने संघर्षों की गाथा को याद कर सकें। डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक-इलाहाबाद संग्रहालय।