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Independence Day 2020: प्रयागराज में हुई थी महात्मा गांधी के हाथों बने दांडी के नमक की नीलामी

Fri, 14 Aug 2020 01:38 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news: दांडी यात्रा का नमक जो प्रयागराज संग्रहालय में सुरक्षित है। - फोटो : prayagraj
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दांडी यात्रा के समय महात्मा गांधी के हाथों बनाया गया नमक इलाहाबाद संग्रहालय में संजो कर रखा गया है। तब दांडी से लाए गए नमक की प्रयागराज में छह सौ रुपये में नीलामी हुई थी। उस नमक की नीलामी से मिली धनराशि को स्वतंत्रता आंदोलन में लगाया गया था। इस नमक को गांधी बीथिका में प्रदर्शित किया जाएगा।

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prayagraj news : दांडी यात्रा नमक के नीलामी के दस्तावेज। - फोटो : prayagraj
इलाहाबाद संग्रहालय में दांडी के नमक की नीलामी से जुड़े दस्तावेज भी सुरक्षित हैं। नीलामी दस्तावेज के मुताबिक 6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के अपने सहयोगियों के साथ इस नमक को बनाया था। साबरमती आश्रम से 24 दिन की यात्रा कर पांच अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी अपने समर्थकों के साथ अंग्रेजों के नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी पहुंचे थे।

prayagraj news : दांडी यात्रा नमक के नीलामी के दस्तावेज। - फोटो : prayagraj
इस यात्रा के जरिए बापू ने समुद्र के किनारे बसे शहर दांडी में औपनिवेशिक भारत में नमक बनाने के लिए अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाले कानून को तोड़कर और नमक बनाया था। नमक सत्याग्रह समाप्त होने के बाद उस नमक के दो पैकेट इलाहाबाद गए गए थे। यहां लाए गए बापू के बनाए दांडी के नमक की नीलामी कराई गई थी। तब उस नमक को शहर के ही एसके दर ने अपने मित्र की मदद से छह सौ रुपये की बोली लगाकर ले लिया था।
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prayagraj news : दांडी यात्रा नमक के नीलामी के दस्तावेज। - फोटो : prayagraj
बाद में उस नमक को इलाहाबाद संग्रहालय को दान दे दिया गया। फिलहाल संग्रहालय में दांडी का वह नमक एक शीशी में सुरक्षित रखा गया है। इस नीलामी से जुड़े तीन दस्तावेज भी संग्रहालय ने रखे हुए हैं। जिसमें दांडी से इलाहाबाद नमक लाए जाने से लेकर नीलामी प्रक्रिया तक का तिथिवार विवरण दिया गया है। इस नमक सत्याग्रह केदौरान 8,000 भारतीयों को जेल में डाल दिया गया था जिसमें इलाहाबाद के भी कई क्रांतिकारी शामिल थे। संग्रहालय निदेशक डॉ सुनील गुप्ता का कहना है कि दांडी का नमक संग्रहालय की अनमोल धरोहरों में से एक है। इसे गांधी पर आधारित प्रदर्शनी के दौरान शो केश में लगाया गया था।

मौजूदा समय गांधी बीथिका का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद उस नमक को गांधी बीथिका में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि देश-दुनिया के पर्यटक उसे देखने के साथ ही उन पुराने संघर्षों की गाथा को याद कर सकें। डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक-इलाहाबाद संग्रहालय।
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