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तीन ज्वेलर्स समूहों के पांच प्रतिष्ठानों पर आयकर सर्वे

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Income Tax Survey on Five Establishments of Three Jewelers Groups - फोटो : ALDCOMPACT
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तीन ज्वेलर्स समूहों के पांच प्रतिष्ठानों पर आयकर सर्वे
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क्रासर
चौक के मीरगंज, प्रीमनगर व केंद्रांचल में एक साथ आयकर सर्वे से मचा हड़कंप
बेहिसाब सोने-चांदी की खरीद-बिक्री पकड़ी गई, करोड़ों रुपये की कर चोरी की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शहर में शुक्रवार को तीन ज्वेलर्स समूहों के पांच प्रतिष्ठानों पर एक साथ आयकर सर्वे की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। पुलिस की मदद से आयकर अफसरों की टीमों ने चौक के मीरगंज, प्रीतमनगर व केंद्रांचल स्थित आभूषण प्रतिष्ठानों के रिकार्ड खंगाले। इस कार्रवाई में बिना रसीद के करोड़ों रुपये के सोने-चांदी की खरीद-बिक्री का पता चला है। साथ ही स्वर्ण आभूषणों को बेहिसाब भंडारण की भी जानकारी मिली है। सर्वे की कार्रवाई शनिवार तक जारी रह सकती है।
प्रधान आयकर आयुक्त सुवचन राम के नेतृत्व में आयकर अफसरों की पांच टीमें इन प्रतिष्ठानों पर एक साथ पहुंचीं। इसमें चौक के मीरगंज स्थित धनगिरि ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुनील कुमार गुप्ता व अंजू गुप्ता से पूछताछ की गई। इनसे फर्म के जरिए सोने-चांदी की खरीद -बिक्री के रिकार्ड, कैशबुक, रसीदें व अन्य रिकार्ड कब्जे में ले लिए गए। इनकी ही दूसरी फर्म स्वर्ण का निकेतन पर भी उसी समय सर्वे शुरू किया गया। इनके अलावा मीरगंज के ही रवि ज्वेलर्स व भगवती ज्वेलर्स की तीन फर्मों पर सर्वे आरंभ हुआ। भगवती ज्वेलर्स के संचालक सौरभ रस्तोगी व इनकी ही प्रीतमनगर व केंद्रांचल स्थित दूसरी फर्मों पर भी आयकर की टीमें पहुंचीं। केंद्रांचल में दुर्गेश्वरी ज्वेलर्स के नाम से संचालित फर्म के मालिक ऋषभ रस्तोगी से पूछताछ की गई। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की कर चोरी की आशंका है। देर रात तक सर्वे की कार्रवाई जारी थी। इस सर्वे में संयुक्त आयकर आयुक्त एहतेशाम अंसारी के अलावा उपायुक्त मोहित निगम, केएन सोनकर, आयकर अधिकारियों में एके मालवीय,बीएल छिब्बर, रोमा सोधी, चंदीलाल, जुनैद अहमद, सर्चिल कुमार, दीपक अग्रवाल शामिल थे।
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इनसेट
महीने भर की रेकी के बाद मीरगंज में पकड़ी गई ज्वेलरी फर्म
प्रयागराज। बड़े पैमाने पर आयकर चोरी की जानकारी मिलने पर धनगिरि ज्वेलर्स को महीने भर की रेकी के बाद पकड़ा जा सका। प्रधान आयकर आयुक्त सुवचन राम ने बताया कि धनगिरि ज्वेलर्स का आयकर रिटर्न कोलकाता से भरा जा रहा था, ताकि इसे पकड़ा न जा सके। रेकी के बाद अंतत: इसकी सटीक पहचान की गई और सर्वे के लिए वारंट जारी किया गया।
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