दान व चंदा लेने वाली संस्थाओं पर आयकर का शिकंजा कस गया है। प्रयागराज व आसपास के इलाकों में चार सौ से अधिक ऐसी संस्थाओं की जांच शुरू हो गई है। इसमें सामाजिक शैक्षणिक हित व धर्म प्रचार के लिए काम करने वाले ट्रस्ट व समितियां शामिल हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऐसी संस्थाओं को दान सिर्फ शांति और कल्याण के लिए ही नहीं, काले धन को सफेद करने के लिए भी दिए जाने की जानकारी मिली है। इसके तहत दान देने वालों की स्थिति की भी जांच कराई जाएगी।
नोटबंदी केबाद धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करने केमामले सामने आए हैं। पता चला है कि इसमें ज्यादातर सामाजिक, शैक्षणिक क्षेत्रों में काम करने वाली समितियां शमिल हैं। प्रयागराज समेत आसपास के जिलों में दान व चंदा लेने वाली धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक समितियां आयकर के निशाने पर हैं। आयकर अधिकारी दाउद अहमद ने बताया कि बाघंबरी गद्दी मठ, निर्मल गंगा संस्थान के अलावा शहर की कुछ मंदिर समितियों समेत ऐसी चार सौ से अधिक संस्थाओं को चिह्नित किया गया है और इनको मिलने वाले दान व दान के माध्यमों की जांच की जा रही है।
ता चला है कि ऐसे मठ, मंदिरों की आड़ में काले धन को सफेद किया जा रहा है। धारा-80 जी के तहत आयकर में छूट के लिए पंजीकृत इन धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं का इस्तेमाल लोक कल्याण की आड़ में बड़े लोग कर रहे हैं। इससे आयकर विभाग चौकन्ना हो गया है। दान के बदले रसीद जारी करने वाली इन संस्थाओं के साथ ही दानादाताओं पर भी आयकर की पैनी नजर है। पता लगाया जा रहा है कि दान देने वालों की हैसियत क्या है। दान व चंदे का विवरण मिलाया जा रहा है। गड़बड़ी मिलने पर इनके विरुद्ध कड़े कदम उठाए जाने के संकेत मिले हैं।
चैरिटी के लिए काम करने वाले ट्रस्टों व कोआपरेटिव सोसाइटियों की भूमिका की जांच कराई जा रही है। इसके लिए अलग से गठित सेल काम कर रहा है। सुवचन राम, प्रधान आयकर आयुक्त।