फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी नौकरी के फेर में नहीं छूट रहा अंग्रेजी पढ़ाने का मोह

Tue, 26 Jul 2016 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी के बढ़ते प्रयोग एवं अंग्रेजी का ज्ञान आज की जरूरत बन जाने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम वाले निजी स्कूलों में पढ़ाने को वरीयता दे रहे हैं। अभिभावकों को लगता है कि  सरकारी नौकरी, बड़ा पद और प्रतिष्ठा पाने में अंग्रेजी का ज्ञान बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसका नतीजा है कि अभिभावक सत्र शुरू होने के बाद भी अपने बच्चों के एडमिशन के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) एवं सर्व शिक्षा अभियान की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
विज्ञापन


राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे में कहा गया है कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों का मानना है कि हर क्षेत्र में बढ़ते अंग्रेजी के क्रेज के कारण उन्हें यह विकल्प चुनना पड़ा। उनका मानना है कि अंग्रेजी के ज्ञान से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। उच्च शिक्षा इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, कंप्यूटर आदि की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में होने के कारण बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दे रहे हैं।

सर्वे में पता चला कि अंग्रेजी में व्यावसायिक एवं रोजगार के अवसर अधिक होने से उनका रूझान बढ़ा है। उनका मानना है कि विदेशों के अतिरिक्त गैर हिन्दी भाषी राज्यों में अंग्रेजी संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग होती है। एससीईआरटी की ओर से यह सर्वे उत्तर प्रदेश के 20 जिलों के निजी स्कूलों के बच्चों के 761अभिभावकों पर किया गया। इसमें 302 अभिभावक ग्रामीण और 459 शहरी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले थे। यह सर्वे इलाहाबाद, भदोही, बलिया, गाजीपुर, गोरखपुर, जौनपुर सहित 20 जिलों में किया गया।
विज्ञापन

निजी स्कूलों में पढ़ाने के कारण बच्चों के लिखित कार्य ठीक से जांच की जाती है, उसमें सुधार के मौके दिए जाते हैं। बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। बच्चों को नई जानकारी देने के लिए चार्ट, नक्शे, मॉडल और शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। पढ़ाने के लिए आईटी एवं कंप्यूटर आदि का प्रयोग किया जाता है। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जाता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें