प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संजय कुमार बिंद उर्फ संजय एवं तीन अन्य बनाम प्रदेश सरकार केस की अग्रिम जमानत की याचिका पर आदेश पारित करते हुए ये कहा कि प्राथमिकी केअवलोकन पर प्रथम दृष्टया एससी, एसटी एक्ट केप्रावधानों केअनुसार अपराध नहीं बनता है तो, ऐसी दशा में अग्रिम जमानत का आदेश पारित किया जा सकता है।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि एससी, एसटी एक्ट में उन्हीं मामलों में अग्रिम जमानत का आदेश दिया जा सकता है, जिसमें प्रथम दृष्टया आपराध होना न प्रतीत होता है। अगर प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत हो रहा है तो, ऐसे मामलों में याची को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं मिल सकता है। प्रथम दृष्टया अपराध प्रतीत न होने पर ही याची अग्रिम जमानत का लाभ पाने का हकदार हो सकेगा।
हाईकोर्ट ने इस याचिका का निस्तारण सुप्रीम कोर्ट के एक अक्तूबर 2019 के आदेश में दिए गए निर्देश केआधार पर किया है। मामला भदोही जिले का है। कपूरचंद पासी ने संजय कुमार बिंद उर्फ संजय सहित चार अन्य के खिलाफ 30 अक्तूबर 2019 को आईपीसी और एससी, एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विरोधी पक्ष संजय कुमार बिंद उर्फ संजय ने मामले में अर्जी दाखिल कर अग्रिम जमानत की मांग की थी।