सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाहाबाद हाईकोर्ट में व्यापक सुरक्षा इंतजाम का काम बजट की कमी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सुरक्षा उपकरणों को लगाने के लिए सरकार द्वारा धनराशि जारी करने में विलंब होने से ऐसा हो रहा है। हाईकोर्ट की सुरक्षा की मॉनिटरिंग कर रही सात न्यायाधीशों की पीठ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह संबंधित विभागों के साथ दस दिन के भीतर बैठक कर कठिनाइयों को दूर करें। कोर्ट ने मुख्य सचिव को अन्य अधिकारियोें के साथ 27 जनवरी को कोर्ट में उपस्थित होने का भी आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की सुरक्षा के लिए बायोमिट्रिक सिस्टम, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, फ्लैप गेट और बैगेज स्कैनर लगाया जाना है। इसके अतिरिक्त कोर्ट परिसर के चप्पे-चप्पे की निगरानी के लिए 180 सीसीटीवी कै मरे, एक निगरानी हॉल का भी निर्माण होना है। यह सभी काम 13 मार्च 2016 को हाईकोर्ट की 150वीं वर्षगांठ समारोह से पूर्व होने थे, मगर समय रहते बजट नहीं जारी होने से अब तक मात्र सीसीटीवी कैमरे लगाने का ही काम हो पाया है। शेष काम लटका हुआ है।गत 13 जनवरी को वृहद पीठ के समक्ष मामला प्रस्तुत होने पर पीठ ने मौजूदा स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। सुरक्षा इंतजामों पर कुल 32.08 करोड़ रुपये का खर्च होना है।
महाधिवक्ता ने 11 दिसंबर को बताया था कि हॉल में केबल वर्क पूरा हो गया है और सिविल कार्य जो 26 अक्तूबर 2015 तक पूरा होना था, अब 31 जनवरी 2016 तक पूरा हो पाएगा। इसके बाद सुरक्षा उपकरणों को लगाने का काम होगा, मगर इसके बाद कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई। सरकार की ओर से प्रस्तावित बजट का अनुमोदन न होने से सुरक्षा का काम जहां का तहां रुका है।
निचली अदालतों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए सभी जिला अदालतों में भी सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रस्ताव है। इसमें 2690 सीसीटीवी कैमरा, 425 डोर मेटल डिटेक्टर, 617 हैड हेल्ड मेटल डिटेक्टर और 100 बैगेज स्कैनर लगाए जाने हैं। यह काम 30 जून 2016 तक पूरा हो जाना है। निविदा की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। जिला अदालतों की सुरक्षा के लिए सरकार ने 75 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।