यमुनापार के नैनी बाजार में दो नहीं तीन दिन होली मनाई जाती है। दो दशक पहले शुरू हुई परंपरा आज भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। नैनी बाजार को दोनों और बैरिकेट कर वाहनों के प्रवेश को बंद कर दिया जाता है और पूरे बाजार में महिलाएं और पुरुष गुलाल उड़ाते हैं।
स्थानीय पार्षद राकेश जायसवाल ने बताया कि दो दशक पहले रमजान का जुमा होली के दूसरे दिन पड़ा था। इसे देखते हुए एहतियात के तौर पर होली में रंग जल्द ही बंद करा दिया गया। बाजार के व्यापारियों ने अगले दिन यानी होली के तीसरे दिन जमकर होली खेली। कुछ व्यापारी नेताओं ने इसे शुरू कराया था और इसके बाद से ही यह परंपरा चालू हो गई, जो अभी तक चली आ रही है।
व्यापारियों ने बताया कि पहले नैनी बाजार में ही सब्जी मंडी हुआ करती थी। होली होने के कारण पहले और दूसरे दिन किसान अपनी उपज लेकर बाजार में नहीं पहुंचते थे। मंडी बंद होने के कारण तीसरे दिन भी होली खेली जानी शुरू कर दी गई।
पूर्व पार्षद विनय बाबा के अनुसार होली के दूसरे दिन रंग बंद कराते हुए कुछ लोगों को थाने ले जाया गया था, जिसको लेकर व्यापारियों ने तीसरे दिन भी होली खेले जाने का निर्णय लिया, जो आज तक चला आ रहा है। वजह चाहे जो हो लेकिन नैनी बाजार की तीसरे दिन खेली जाने वाली कपड़ा फाड़ होली पूरे यमुनापार के प्रसिद्ध है। यहां महिला और पुरुष अलग-अलग ग्रुप में होली का आनंद लेते है। दोपहर 11 बजे के बाद शुरू होने वाली होली शाम चार बजे तक चलती है। पूरे बाजार में अबीर की बोरियां रखी जाती है, फौव्वारे सजाए जाते है और खान पान की भी व्यवस्था व्यापारियों द्वारा की जाती है।