दोस्ती में बदरे आलम ने दे दी विहिप को जमीन, सदस्यता भी ली
गंगापार में विहिप कार्यालय निर्माण के लिए दो बिस्वा जमीन कर चुके हैं दान
विहिप गंगापार के कार्यवाहक अध्यक्ष सर्वेश मिश्र के कहने पर दी थी जमीन
प्रयागराज/फूलपुर। दोस्ती, सांप्रदायिक सद्भाव सहित आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए जिन चुनिंदा लोगों ने एक मिसाल पेश की उसमें फूलपुर के आटा गांव निवासी डा. बदरे आलम वारसी का नाम भी शामिल है। उन्होंने विहिप के एक पदाधिकारी के कहने पर दोस्ती और सौहार्द के लिए दो बिस्वा जमीन विहिप गंगापार कार्यालय बनाने के लिए दे दी। इतना ही नहीं, उन्होंने विहिप की सदस्यता भी ली। विहिप ने गंगापार का कार्यालय अभी वहां भले ही न बनवाया हो लेकिन, बाउंड्रीवॉल जरूर करवा ली है।
दुबई में 17 वर्ष काम करने के बाद पिछले कुछ वर्ष से डा. बदरे आलम आटा गांव में ही अपने परिवार के सदस्यों के साथ रह रहे हैं। तीन पुत्र और एक पुत्री के पिता डा. बदरे आलम रिलायंस में एडवाइजर के रूप में काम कर चुके हैं। वर्तमान समय वह आटा गांव में कृषि कार्य करवा रहे हैं। वह बताते हैं कि विहिप के गंगापार के कार्यवाहक अध्यक्ष सर्वेश कुमार मिश्र से उनकी अच्छी दोस्ती है। उनके कहने पर पर दो संप्रदाय के बीच सद्भाव को मजबूती देने के लिए पहले विश्व हिंदू परिषद की सदस्यता ली। साथ ही उनके कहने पर दो बिस्वा जमीन भी दान दे दी। 31 अक्टूबर 2017 को विश्व हिन्दू परिषद प्रयागराज द्वारा सर्वेश कुमार मिश्र के नाम अपनी दो बिस्वा जमीन का बैनामा करते हुए दान कर दिया। डा. बदरे आलम बताते हैं कि विहिप के कार्यकलाप उन्हें पसंद है। इसी से प्रभावित होकर उन्होंने दो बिसवा जमीन अपने मित्र सर्वेश मिश्र के कहने पर विहिप के नाम कर दी। डा. बदरे आलम के अनुसार वह मंदिर, मस्जिद दोनों ही जगह जाते हैं। बदरे आलम का बड़ा बेटा मर्चेंट नेवी में है तो बेटी एलएलबी कर रही है। विहिप के सर्वेश मिश्र ने बताया कि निश्चित ही बदरे आलम ने जो मिसाल पेश की वह काबिले तारीफ है। उन्होंने बताया कि फूलपुर का इलाका मुस्लिम बहुल है, लेकिन फिर भी यहां मुस्लिम समाज के लोग समय-समय विहिप के तमाम कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं। सर्वेश ने बताया कि वहां बाउंड्रीवॉल करवा दी गई है, लेकिन अभी कार्यालय नहीं बनाया गया है।