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High Court:जीएसटी चोरी में कारण ही नहीं, गिरफ्तारी का लिखित आधार बताना भी जरूरी, व्यापारी को रिहा करने का आदेश

Wed, 18 Feb 2026 01:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जीएसटी चोरी मामले में गिरफ्तारी का कारण बताना ही पर्याप्त नहीं है, उसका लिखित आधार देना जरूरी है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर कोई भी गिरफ्तारी अवैध होगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जीएसटी चोरी मामले में गिरफ्तारी का कारण बताना ही पर्याप्त नहीं है, उसका लिखित आधार देना जरूरी है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर कोई भी गिरफ्तारी अवैध होगी। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मेरठ के व्यापारी जय कुमार अग्रवाल की गिरफ्तारी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। मामले के मुताबिक 29 दिसंबर को महानिदेशक जीएसटी की विजलेंस गाजियाबाद की टीम ने याची के घर की तलाशी ली थी। इसके बाद 16 जनवरी को जीएसटी चोरी के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान मेमो में गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया था।

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लिहाजा, गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग के साथ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय न तो आधार लिखित में दिए गए, जबकि विभाग की ओर से जारी 13 जनवरी 2025 के सर्कुलर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी को गिरफ्तार करते वक्त लिखित रूप से आधार बताना जरूरी। कोर्ट ने पाया कि सीजीएसटी अधिनियम की धारा-69 में जीएसटी चोरी के मामले में भी गिरफ्तारी की प्रक्रिया दी गई है।

इसके मुताबिक कमिश्नर के पास गिरफ्तारी के लिए विश्वास के कारण होने चाहिए। कारण बताया जाना इसलिए जरूरी नहीं है। क्योंकि, यह इस गोपनीय दस्तावेज है। लेकिन, गिरफ्तारी के आधार आरोपी को लिखित रूप में दिया जाना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि यह जानना आरोपी का सांविधानिक अधिकार भी है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सत्येंद्र कुमार अंतिल के मामले का भी जिक्र किया। कहा कि सात साल से कम की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी केवल अपवाद स्वरूप ही की जा सकती है। लिहाजा, कोर्ट ने रिमांड आदेश को रद्द करते हुए याची को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

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