प्रतिवादी के वकील ने दलील दी कि याची की टिप्पणियां उचित नहीं थीं। पूरे घटनाक्रम को एक साथ लिया जाए तो कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का मामला बनता है। यही नहीं एक अन्य महिला के यौन उत्पीड़न के संबंध में याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी को भी अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पर लाया गया। दलील दी गई कि विभाग में काम करने वाली कई महिलाएं याची के व्यवहार से असहज महसूस करती हैं।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि निलंबन सजा नहीं है, बल्कि आरोपी को उसके खिलाफ चल रही जांच व कार्यवाही को प्रभावित करने से रोकने का एक उपाय है। मामले में कोर्ट ने याची को अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही अपीलीय प्राधिकारी को दो माह के भीतर इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
हमारे समाज में स्वीकार नहीं है बॉडी शेमिंग
कोर्ट ने सीबी बॉबी बनाम केरल राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि बॉडी शेमिंग हमारे समाज में स्वीकार नहीं है। लोगों के शरीर, चाहे वे बहुत मोटे हों या पतले हों। बहुत छोटे हों या लंबे हों। बहुत गोरे हों या काले हों। इस पर टिप्पणी करने से सभी को बचना चाहिए।