राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना नहीं होगी कार्रवाई: हाईकोर्ट
प्रयागराज। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर और आईआईटी धनबाद के निदेशक राजीव शेखर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय और आईआईटी कानपुर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इस आशय का हलफनामा केंद्र सरकार और आईआईटी कानपुर की ओर से हाईकोर्ट में दिया गया है। इस अंडरटेकिंग के बाद कोर्ट ने सभी पक्षकारों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए याचिका नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
राजीव शेखर की याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सुनवाई की। याचिका में सचिव मानव संसाधन विकास मंत्रालय के 23 अगस्त 2019 के आदेश को चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि आईआईटी काउंसिल के चेयरमैन (एचआरडी मिनिस्टर) ने याची के खिलाफ कार्रवाई पर सहमति दे दी है। कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में अभी तक आईआईटी कानपुर के विजिटर (राष्ट्रपति) से कार्रवाई की अनुमति नहीं प्राप्त की गई है। मामला आईआईटी काउंसिल में अभी रखा जाना है। राष्ट्रपति ही याची के नियुक्ति प्राधिकारी हैं।
आईआईटी कानपुर की ओर से इस आशय का हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि जबतक विजिटर के निर्देश नहीं प्राप्त हो जाते हैं, सचिव आईआईटी कानपुर इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं करेंगे। इस आशय की अंडरटेकिंग के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल स्थगनादेश की अर्जी पर कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। याचिका पर चार सप्ताह के बाद सुनवाई होगी। प्रोफेसर राजीव शेखर आईआईटी कानपुर में चल रहे एससी-एसटी विवाद में घिरे हैं।