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ट्रिपलआईटी के छात्रों के तैयार ड्रोन को मिली अंतर्राष्ट्रीय मान्यता

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संस्थान के दो शोधार्थी विकसित कर रहे कृषि के क्षेत्र में काम आने वाला ड्रोन
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प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के दो शोध छात्रों पवन कुमार और शेफाली विनोद रामटेके की ओर से तैयार किए जा रहे ड्रोन को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है। खेती के उद्देश्य को लेकर तैयार हो रहे ड्रोन के जरिए देश में कृषि क्षेत्र में प्रगति होगी। दोनों शोधार्थियों के प्रोजेक्ट को ग्रीस सरकार ने सात सितंबर को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय फ्यूचर एग्रो चैलेंज प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। ग्रीस के थेसालोनिकी में होने वाले कार्यक्रम में भारत एवं ग्रीस के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रीस के प्रधानमंत्री क्य्रिअकोस मित्सोताकिस करेंगे।
ट्रिपलआईटी के पवन और शेफाली पीएस-1925 नाम से तैयार स्टार्टअप कंपनी के तहत खेती के लिए ड्रोन विकसित कर रहे हैं। दोनों शोधार्थी ट्रिपलआईटी से पीएचडी कर रहे हैं। इनका कहना है कि हम भारत में प्रोटोटाइप ड्रोन का विकास और डिजाइन तैयार कर रहे हैं। इसमें सफलता मिली तो अन्य देशों से ड्रोन खरीदने के बजाय हम पेशेवर और स्वचालित ड्रोन बना सकेंगे। पीएस-1925 एक ड्रोन निर्माता प्रौद्योगिकी और सेवा देने वाली कंपनी है, जो मानव रहित हवाई वाहन डिजाइन करती है। कंपनी का उद्देश्य मेक इन इंडिया के सिद्घांत पर देश में ड्रोन तकनीक लाना है।
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शोधार्थी पवन का कहना है कि हमारी कंपनी पिछले दो वर्षों से हमारे संस्थान में ड्रोन पर काम कर रही है और उन्होंने विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए रेडियो नियंत्रित एयरक्रॉफ्ट और ड्रोन के लिए डिजाइन विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि हम भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में प्रमुख शेयरों को संचालित करने वाले सात प्रमुख क्षेत्रों के लिए ‘देसी ड्रोन’ का प्रस्ताव कर रहे हैं। देश में तैयार हो रहे ड्रोन से कृषि, आपदा प्रबंधन और राहत अभियान,वायु, ई-कॉमस, कूरयिर, स्वास्थ्य, ऊर्जा और परिवहन के लिए ड्रोन तैयार करेंगे। संस्थान के निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने दोनों छात्रों की उपलब्धि पर शुभकामना व्यक्त की।
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