प्रयागराज । कोविड-19 के मद्देनजर रेल टिकट के रिफंड नियमों में रेलवे ने परिवर्तन किया है। इस नए नियम के तहत अगर कोई ट्रेन निरस्त होती है तो उसका रिफंड यात्री तीन माह में ले सकते हैं। ई टिकट वालों का रिफंड उनके अकाउंट में पहले की तरह खुद ही पहुंच जाएगा। जबकि जो यात्री रिजर्वेशन काउंटर से टिकट लेते हैं उन्हें भी तीन माह तक छूट रहेगी कि वह किसी भी दिन आकर अपना टिकट दिखा कर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। पहले इस सुविधा का लाभ ट्रेन रवानगी के 72 घंटे बाद तक लिया जा सकता था। दरअसल कोरोना की वजह से रेलवे द्वारा तमाम ट्रेनों का निरस्तीकरण किया गया है। इसके अलावा यात्री खुद भी यात्रा अपने निरस्त कर रहे हैं ।भारत सरकार द्वारा कोविड- 19 के संबंध में भीड़-भाड़ से बचाव एवं समाज में व्यक्तियों के आपस में दूरी बनाए रखने हेतु दिशा निर्देश जारी किया गया है ।जिसके तहत भारतीय रेलवे द्वारा पीआरएस काउंटर द्वारा जारी टिकटों की धनवापसी में छूट प्रदान की गई है। ई-टिकट के लिए सभी नियम समान हैं क्योंकि यात्री को टिकट वापसी के लिए स्टेशन आने की जरूरत नहीं है। यह छूट 21 मार्च - 21 जून 2020 तक की यात्रा अवधि के लिए है। इसके तहत यात्रा की तारीख से तीन माह तक टिकट जमा करने पर रिफंड लिया जा सकता है। इसके अलावा यदि ट्रेन रद्द नहीं हुई और यात्री यात्रा नहीं करना चाहता, तो उसका टीडीआर (टिकट जमा रसीद) स्टेशन पर यात्रा की तारीख से तीन माह के भीतर टिकट जमा किया जा सकता है। पहले यह नियम 3 दिन के लिए था। उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ डॉ अमित मालवीय ने बताया की टीडीआर को सीसीओ / सीसीएम दावा कार्यालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। ट्रेन चार्ट के सत्यापन के लिए TDR दाखिल करने के 60 दिनों के भीतर धनवापसी हो सकती है। जो यात्री रेलवे की 139 सेवा के माध्यम से टिकट रद्द करना चाहते हैं, वे यात्रा की तारीख से तीन माह के भीतर काउंटर पर रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।