ट्रिपलआईटी रोड नंदी चौराहे तक तो चकाचक है मगर वहां से 50 मीटर आगे बढ़ते ही तस्वीर एकदम पलट जाती है। दिनभर धूल का गुबार। गड्ढों में हिचकोले खाते वाहन। यह दृश्य आम है। यह स्थिति महीने-छह महीने से नहीं बल्कि दो साल से बनी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वह किसी काम से बाहर निकलते हैं तो पांच मिनट में ही कम से कम 25 ग्राम धूल उनके मुंह व नाक में भर जाती है। खास बात यह है कि इस सड़क को बनाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका तक दाखिल हो चुकी है मगर जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ा। इसी सड़क पर पीडीए की मंहगी योजनाओं में एक मौसम विहार अपार्टमेंट है। इसके सामने मंगल विहार अपार्टमेंट है। सैनिक कॉलोनी तो है ही। सैनिकों की एक और कॉलोनी की प्लॉटिंग भी हो रही है।
शनिवार को सैनिक कॉलोनी में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दौरान लोगों की पीड़ा छलक उठी। मंगल विहार अपार्टमेंट के सामने बनी नाली से पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर बहता रहता है। यहां कई बार ईरिक्शा पलट चुका है। स्थानीय लोग कई बार पीडीए और नगर निगम का चक्कर काट चुके हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
सड़क के आखिरी छोर पर शहीद वीर अब्दुल हमीद चौराहे का बोर्ड लगा है। वह भी धूल से सना है। आर्मी कॉलोनी के लोगों ने बिजली की समस्या को उठाते हुए नंदी ग्राम फीडर से लाइन हटाने की मांग उठाई। इसके अलावा कसारी-मसारी की 120 फिट रोड पर साइन बोर्ड लगाने को कहा। स्थानीय लोगों ने साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पानी की समस्या व सफाई की मांग भी उठाई।
नालों की सफाई के लिए अलग से बजट की मांग
स्थानीय पार्षद मिथलेश सिंह ने जाफरी व प्रजापति नाले की सफाई को लेकर अलग से बजट की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जोन कार्यालय को नाले के सफाई की जिम्मेदारी देना गलत है। उन्होंने बताया कि इन दोनों नालों की अब तक दो से तीन बार सफाई हो जानी चाहिए थी।