कुल भाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ.श्याम लाल गुप्ता 30 जून 2002 को सेवानिवृत्त हुए थे। वह इस समय नियमित पेंशन पा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ग्रेच्युटी की मांग करते हुए नियंत्रक प्राधिकारी को अर्जी दी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय या संबद्ध कॉलेज के अध्यापकों या स्टाफ ने यदि 60 साल में बिना ग्रेच्युटी के पारिवारिक पेंशन का विकल्प चुना है तो उसकी मांग करना सही नहीं है। कोर्ट ने नियंत्रक प्राधिकारी के सेवानिवृत्त अध्यापक के ग्रेच्युटी भुगतान के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति सीके राय ने कुल भास्कर आश्रम पीजी काॅलेज प्रयागराज की प्रबंध समिति की याचिका पर यह आदेश दिया।
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कुल भाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ.श्याम लाल गुप्ता 30 जून 2002 को सेवानिवृत्त हुए थे। वह इस समय नियमित पेंशन पा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ग्रेच्युटी की मांग करते हुए नियंत्रक प्राधिकारी को अर्जी दी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। ग्रेच्युटी के 350,000 रुपये के भुगतान का आदेश दे दिया। इस आदेश को काॅलेज प्रबंध समिति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा राज्य विश्वविद्यालय एक्ट के अनुसार याची ने सेवानिवृत्ति विकल्प भरते समय पेंशन व पारिवारिक पेंशन का विकल्प दिया था, ग्रेच्युटी छोड़ दी थी। इसलिए उसे ग्रेच्युटी का दावा करने का अधिकार नहीं है। नियंत्रक प्राधिकारी का आदेश विधि सम्मत नहीं है।