कहते हैं, ‘दूध का जला छांछ भी फूंक-फूंककर पीता है।’ हॉस्टलों के मसले पर विश्वविद्यालय प्रशासन भी कुछ इसी तरह आगे बढ़ रहा है। एक तरफ हॉस्टलों में वॉश आउट की कार्रवाई प्रस्तावित है तो दूसरी ओर हॉस्टल नियमावली में संशोधन की तैयारी चल रही है, जिसकी जिम्मेदारी कुलपति की ओर से गठित कमेटी को सौंपी गई है। कमेटी अलग-अलग हॉस्टलों की नियमावली का अध्ययन कर रही है और उन सभी बिंदुओं को लागू करने पर विचार हो रहा है जो हॉस्टलों की बेहतरी के लिए जरूरी हैं। संशोधित नियमावली को जल्द ही एकेडमिक काउंसिल की बैठक में हरी झंडी मिल सकती है।
जेएनयू में प्रावधान है कि कोई छात्र-छात्रा निर्धारित समय के बाद हॉस्टल नहीं छोड़ता है और कब्जा जमाए रहता है तो उसकी डिग्री वापस ले ली जाती है। इस प्रावधान को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में भी लागू किए जाने की योजना है। इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमवार हॉस्टल आवंटित किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर स्नातक का हॉस्टल अलग और परास्नातक छात्रों के लिए अलग हॉस्टल है। इसी तर्ज पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी हॉस्टलों को पाठ्यक्रमवार आवंटित किए जाने की योजना है। इस योजना के तहत हॉस्टल आवंटित किए जाने पर निर्धारित समय के बाद उन्हें खाली कराना एवं नए छात्रों को हॉस्टल आवंटित करने की प्रक्रिया आसान हो जाती है और विवाद भी कम होता है।
इसके अलावा हॉस्टलों की फीस बढ़ाए जाने की भी योजना है। हालांकि, ये सभी संशोधन अभी प्रस्तावित हैं। हॉस्टल नियमावली में संशोधन के लिए कुलपति की ओर से गठित कमेटी इन सभी बिंदुओं पर विचार कर रही है। साथ ही दूसरे विश्वविद्यालय के हॉस्टलों की नियमावली में अन्य बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है। हॉस्टल की संशोधित नियमावली एकेडमिक काउंसिल से मंजूरी के बाद ही लागू की जा सकेगी।