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Prayagraj : समझौते का उल्लंघन तो मांगें हर्जाना, अधूरे दस्तावेज पर नहीं मिलेगा जमीन पर स्टे

Sat, 24 Jan 2026 04:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में कहा है कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) कानूनन अपूर्ण है तो उसके आधार पर जमीन पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त नहीं किया जा सकता।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में कहा है कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) कानूनन अपूर्ण है तो उसके आधार पर जमीन पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त नहीं किया जा सकता। जिस दस्तावेज पर सभी संपत्ति स्वामियों के हस्ताक्षर न हों और जिसका पंजीकरण न कराया गया हो, वह किसी भी पक्ष को संपत्ति पर अधिकार नहीं देता। यदि बिल्डर को लगता है कि एमओयू की शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो वह केवल हर्जाने के लिए कानूनी रास्ता अपना सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने एक बिल्डर फर्म की अपील को खारिज करते हुए दिया है।

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प्रयागराज की अपीलकर्ता मेसर्स साईंधाम अपार्टमेंट और अन्य ने दावा किया था कि 30 मार्च 2014 को उन्होंने जमीन मालिकों से एक एमओयू किया था। इसके तहत जमीन पर बहुमंजिला आवासीय परिसर बनाना था। बिल्डर ने दावा किया कि मानचित्र स्वीकृति, विज्ञापन आदि पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, जमीन मालिकों का दावा था कि सभी मालिकों ने एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

ऐसे में यह एमओयू अमान्य है। उन्होंने बिल्डर की ओर से दी गई राशि लौटा दी है। बिल्डर की और से ट्रायल कोर्ट में उक्त जमीन पर स्टे लगाने अर्जी दायर की गई। अर्जी खारिज होने पर बिल्डर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्टे देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी। साथ ही यथास्थिति के आदेश को समाप्त कर दिया। 

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