जिला अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में पति छंगूलाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, देवर शेरा को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह आदेश अपर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अंजू कनौजिया ने दिया है।
जिला अदालत ने पत्नी की हत्या के मामले में पति छंगूलाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, देवर शेरा को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह आदेश अपर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अंजू कनौजिया ने दिया है।
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कौशाम्बी के थाना पूरामुफ्ती (अब प्रयागराज में) के गांव मनौरी निवासी भाईलाल ने धूमनगंज के बमरौली स्थित गांव लाहुरपार निवासी बेटी के पति छंगूलाल, देवर शेरा और सास बचनी देवी के खिलाफ हत्या और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत 19 जुलाई 2010 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि बेटी की शादी 23 जून 2010 को छंगूलाल से की थी। 19 जुलाई 2010 की रात बेटी की गड़ासे से हत्या कर दी गई। परिजन मौके पर पहुंचे तो खून से लथपथ उसका शव चारपाई पर पड़ा मिला।
कोर्ट ने पति को हत्या का दोषी माना और देवर को आरोपों से बरी कर दिया। सास बचनी देवी की विचारण के दौरान मृत्यु होने से उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। कोर्ट ने छंगूलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसपर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, शेरा को 20 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है।