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Prayagraj : हत्या का आरोपी पति बरी; कोर्ट ने कहा- परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी अधूरी

Fri, 02 Jan 2026 07:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी अधूरी है। मृतका की मां का कहना था कि आरोपी को घटना स्थल से गिरफ्तार किया गया था। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार उसे ट्रोनिका सिटी के गेट नंबर दो से पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी अधूरी है। मृतका की मां का कहना था कि आरोपी को घटना स्थल से गिरफ्तार किया गया था। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार उसे ट्रोनिका सिटी के गेट नंबर दो से पुलिस ने गिरफ्तार किया। घटना स्थाल पर आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के पास कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने दावे को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आजीवन कारावास पाए आरोपी पति को बरी कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्त व न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने राजकुमार की जेल अपील पर दिया है।

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गाजियाबाद के ट्रोनिका थाने में 17 जनवरी 2017 को अपीलकर्ता राजकुमार के खिलाफ पत्नी की हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। मृतक की मां ने आरोपी लगाया था कि उन्होंने अपनी बेटी पूजा की शादी राजकुमार के साथ 25 अप्रैल 2016 को किया था। वह अक्सर उनकी बेटी से लड़ता था। एक दिन उसने छोटे गैस सिलिंडर से बेटी के सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में 2019 में ट्रायल कोर्ट ने राजकुमार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसल को आरोपी ने जेल अपील के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष हत्या का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर पाया है। मृतका की मां ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल से पकड़ा, जबकि जांच अधिकारी के अनुसार गिरफ्तारी ट्रोनिका सिटी के गेट नंबर 2 से हुई। इससे गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। राज्य के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने अपनी पहली शादी छिपाकर मृतका से दूसरी शादी की थी, जो विवाद और हत्या का मुख्य कारण बना। हत्या में इस्तेमाल किया गया सिलिंडर आरोपी की निशानदेही पर बरामद किया गया था।

कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष घटनाओं की ऐसी कड़ी जोड़ने में विफल रहा जो केवल आरोपी के दोष की ओर इशारा करती हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल पर आरोपी की उपस्थिति साबित नहीं हुई है और सिलिंडर की बरामदगी भी संदिग्ध थी क्योंकि वह पहले से ही पुलिस की जानकारी में था। जबकि अभियोजन पक्ष का कहना था कि सिलिंडर आरोपी के बताने पर बरामद हुथा था। इसके साथ ही कोर्ट ने जेल अपील स्वीकार करते हुए आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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