सत्यनारायण का बायां हाथ सूजा हुआ था और अनुराग का बायां पैर भी सूजा हुआ था। अनुराग जब अदालत कक्ष में दाखिल हुए तो वह भी लंगड़ाते हुए चल रहा था। साथ ही गिरफ़्तारी और बरामदगी से जुड़ा वीडियो कोर्ट में चलाया गया। कोर्ट ने पाया कि वीडियो अंधेरे बनाया गया था, जिसमें न तो आरोपी का चेहरा और शरीर दिखा रहा था न ही बरामद सामान। कोर्ट ने चोटों और वीडियों के बारे में विवेचक से पूछा तो विवेचक जबाव नहीं दे सका। खफा कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज कर आरोपी पिता-पुत्र को जमानत पर रिहा कर पुलिस आयुक्त को पुलिस यातना की जांच करने का आदेश दिया है। अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है।